जयपुर के डॉ महिपाल सिंह को लोकोमोटर दिव्यांगता पुनर्वास में योगदान के लिए राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 मिला। 15 वर्षों से वे मरीजों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं।
गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर जयपुर की धरा पर प्रतिभा और सेवा भाव का अनूठा संगम देखने को मिला। 26 जनवरी 2026 को आयोजित एक भव्य समारोह में देश के जाने माने वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट और समाज सेवी डॉ महिपाल सिंह को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026’ से नवाजा गया।
यह सम्मान उन्हें लोकोमोटर दिव्यांगता से जूझ रहे लोगों के जीवन में नई रोशनी भरने और उनके पुनर्वास के लिए किए गए असाधारण कार्यों के लिए दिया गया है। डॉ सिंह की यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा जगत के लिए बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गर्व का विषय है।
15 साल का संघर्ष और हजारों मुस्कान
डॉ महिपाल सिंह का सफर कोई एक रात की सफलता नहीं है बल्कि यह पिछले डेढ़ दशक की कड़ी मेहनत का नतीजा है। वे पिछले 15 वर्षों से लगातार फिजियोथेरेपी और पुनर्वास के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार लोकोमोटर दिव्यांगता एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की हड्डियों जोड़ों या मांसपेशियों में समस्या होने के कारण उसे चलने फिरने या सामान्य कार्य करने में कठिनाई होती है। डॉ सिंह ने अपना पूरा जीवन ऐसे ही बच्चों और वयस्कों को समर्पित कर दिया है जो इस चुनौती का सामना कर रहे हैं।
इलाज से आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता की सोच
अक्सर देखा जाता है कि चिकित्सा केवल बीमारी को ठीक करने तक सीमित रह जाती है लेकिन डॉ महिपाल सिंह की सोच इससे कहीं आगे है। उनका उद्देश्य केवल मरीज को दर्द से राहत दिलाना नहीं है बल्कि उसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।
उन्होंने अपने करियर में सैकड़ों ऐसे मरीजों को ठीक किया है जो कभी दूसरों के सहारे जीने को मजबूर थे। डॉ सिंह की थेरेपी और मार्गदर्शन ने उन्हें शारीरिक रूप से सक्षम बनाने के साथ साथ मानसिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनाया है। उनके इसी होलिस्टिक अप्रोच यानी समग्र विकास की सोच ने जूरी सदस्यों का दिल जीता।
दिव्यांगता को मात देने का जज्बा
समारोह में मौजूद अतिथियों ने डॉ सिंह के काम की सराहना करते हुए कहा कि एक डॉक्टर भगवान का रूप होता है और डॉ महिपाल ने इसे साबित कर दिखाया है। लोकोमोटर दिव्यांगता के शिकार बच्चों को जब वे अपने पैरों पर चलते हुए देखते हैं तो वह पल किसी चमत्कार से कम नहीं होता।
डॉ सिंह ने अपने उपचार में आधुनिक तकनीकों के साथ साथ मानवीय संवेदनाओं को भी जोड़ा है। यही कारण है कि उनके मरीज उन्हें केवल एक डॉक्टर नहीं बल्कि एक मसीहा मानते हैं।
मरीजों को समर्पित किया यह सम्मान
मंच पर पुरस्कार ग्रहण करते समय डॉ महिपाल सिंह बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने मरीजों और उनके परिजनों के विश्वास को दिया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ा देता है।
डॉ सिंह ने संकल्प लिया कि वे भविष्य में भी दिव्यांगजनों के उत्थान के लिए अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। उनका सपना है कि कोई भी व्यक्ति शारीरिक अक्षमता के कारण लाचार महसूस न करें। यह पुरस्कार उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो समाज सेवा के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं।










