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Dussehra 2025: दशहरा 1 या 2 अक्टूबर को? सही तारीख और शुभ मुहूर्त जानकर करें पूजा की तैयारी!

On: सितम्बर 10, 2025 9:39 पूर्वाह्न
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Dussehra 2025: दशहरा 1 या 2 अक्टूबर को? सही तारीख और शुभ मुहूर्त जानकर करें पूजा की तैयारी!
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Dussehra 2025: दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहते हैं, हिंदू धर्म का एक खास त्योहार है, जो बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। यह पर्व हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को धूमधाम से मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में इस त्योहार का गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह भगवान राम और मां दुर्गा की जीत से जुड़ी पौराणिक कथाओं का उत्सव है। आइए जानते हैं कि 2025 में दशहरा कब मनाया जाएगा और इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या होगा।

दशमी तिथि की शुरुआत और समापन

पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 1 अक्टूबर 2025 को दोपहर 2:19 बजे शुरू होगी और 2 अक्टूबर को दोपहर 12:32 बजे खत्म होगी। चूंकि हिंदू परंपरा में उदय तिथि के आधार पर त्योहार मनाया जाता है, इसलिए दशहरा 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन लोग पूजा और उत्सव की तैयारियों में जुट जाएंगे।

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विजय मुहूर्त का समय

दशहरे पर विजय मुहूर्त का खास महत्व होता है, क्योंकि इसे शुभ कार्यों के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। 2 अक्टूबर 2025 को विजय मुहूर्त दोपहर 2:58 बजे से 3:46 बजे तक रहेगा। इस समय में पूजा और शस्त्र पूजन करने से विशेष फल मिलता है।

दशहरे की पूजा विधि

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दशहरे की पूजा के लिए सबसे पहले घर को अच्छे से साफ करें और स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा स्थल पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर चौकी रखें। इस पर भगवान राम, माता सीता, हनुमान जी और मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। अगर नवरात्रि में कलश स्थापना की है, तो उसी का उपयोग करें, वरना नया कलश स्थापित करें और उसमें जल, गंगाजल, सुपारी व सिक्का डालें। पहले गणपति जी का ध्यान करें, फिर सभी देवताओं को कुमकुम, चावल और चंदन का तिलक लगाएं। फूल और माला चढ़ाएं। इस दिन शस्त्र पूजा का विशेष महत्व है, इसलिए अपने हथियार, वाहन, औजार और उपकरणों को साफ करके उन पर हल्दी, कुमकुम और चावल का तिलक लगाएं।

दशहरे का धार्मिक महत्व

दशहरा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि धर्म और शक्ति का प्रतीक है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की जीत हासिल की थी। साथ ही, मां दुर्गा ने नवरात्रि के नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध कर दशमी को उसे हराया था। इसलिए यह पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का उत्सव है। दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा भी पुरानी है। लोग अपने वाहन, औजार और मशीनों की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन शुरू किए गए नए कार्य, जैसे घर बनाना, वाहन खरीदना या व्यवसाय शुरू करना, सफल और शुभ होते हैं।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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