यमुनानगर। अब पटाखे केवल दिवाली पर ही नहीं बजाए जाते, बल्कि शादियों में भी आतिशबाजी करने का ट्रेंड चल पड़ा है। यही वजह है कि शादियों को यादगार बनाने के लिए इनमें दिल खोल कर पटाखे बजाए जा रहे हैं। आतिशबाजी के इस ट्रेंड से ही पटाखा कारोबार काफी फल फूल रहा है। अगले दो-तीन माह में ही जिले में डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा के पटाखे बिकने वाले हैं। शादियों के सीजन का पटाखा कारोबारी भी खूब फायदा उठा रहे हैं। दिवाली पर जिस पटाखे की कीमत 500 रुपये थी वह अब 700 से 800 रुपये का बेचा जा रहा है। लोग रेट को लेकर मोलभाव करते हैं तो कारोबारी कम कीमत पर बेचने को तैयार नहीं हैं।
शादियों में पटाखे चलाने का ट्रेंड
दरअसल चार-पांच साल से शादियों में पटाखे चलाने का ट्रेंड चल पड़ा है। जमीन पर होने वाली आतिशबाजी की जगह स्काई शॉट को ज्यादा त्वज्जो दी जा रही है। यदि किसी लड़के की शादी है तो उसमें केवल एक बार नहीं बल्कि पांच बार आतिशबाजी की जा रही है। लड़के के मंडा कार्यक्रम, बारात विदाई, जयमाला, दूल्हन की विदाई और आखिर में दूल्हन के घर आने पर स्काई शॉट पटाखों से आतिशबाजी की जा रही है।
स्काई शॉट पटाखा आग लगाने पर आकाश में जाकर न केवल तेज आवाज करता है बल्कि इसकी रंग बिरंगी रोशनी भी काफी एरिया में फैल जाती है। बाजार में 12, 30, 60, 100, 120 से लेकर एक ही बार में 500 बार बजने वाले स्काई शॉट पटाखे मौजूद हैं। इनकी कीमत 350 से 2000 रुपये तक है। 500 शॉट वाला पटाखा बहुत महंगा है इसलिए इसकी डिमांड न के बराबर ही है। जिले में सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार ही पटाखा बेचने का लाइसेंस 13 लोगों ने ही ले रखा है।
प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा
शादियों में आतिशबाजी से उन लोगों को तो खुशी मिलती है जिनके घर में शादी है। परंतु, यह दूसरे लोगों के लिए मुसीबत बन जाता है। शादियों में जमकर हो रही आतिशबाजी से हवा में प्रदूषण का स्तर भी काफी बढ़ गया है। कई दिनों से एक्यूआइ 250 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ऊपर बना हुआ है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके अलावा पटाखे जलने के बाद कूड़ा अलग से फैल रहा है।
यमुनानगर जिले में हैं 655 गांव
जानकारों की माने तो ग्रामीण क्षेत्र में एक शादी में औसतन 5,000 रुपये के पटाखे बजाए जा रहे हैं। जबकि शहर में आतिशबाजी की कीमत दोगुना होकर 10,000 रुपये हो जाती है। जिले में 655 गांव हैं। प्रत्येक गांव में यदि अनुमानित दो शादियां भी हों तो 5,000 रुपये की दर से यह राशि एक करोड़ 31 लाख रुपये बनती हैं। इसी तरह शुभ मुहूर्त में शहर में 250 शादियां होने का अनुमान है। इस तरह इनमें 25 लाख रुपये से ज्यादा के पटाखे बजेंगे। यह केवल अनुमानित है। असल में शादियों की संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है।












