हिसार, 17 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। भारतीय संस्कृति में शुक्रवार का दिन केवल एक तिथि मात्र नहीं, बल्कि धन, वैभव और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी की कृपा पाने का महापर्व माना जाता है। शास्त्रों की मानें तो यह दिन माता लक्ष्मी को विशेष रूप से प्रिय है। यही वजह है कि सुख-शांति की कामना करने वाले श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और मां की चौखट पर हाजिरी लगाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और नियम के साथ शुक्रवार का व्रत करता है, उसके जीवन से आर्थिक संकटों के बादल छंटने लगते हैं और घर में बरकत का वास होता है।
मंत्रों की शक्ति, जागृत होगी सकारात्मक ऊर्जा
माता लक्ष्मी की पूजा में मंत्रों का स्थान सर्वोपरि है। सच्चे मन से किया गया मंत्रोच्चार न केवल मन को शांति देता है, बल्कि घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। ज्योतिषियों के अनुसार, शुक्रवार को विशेष मंत्रों का जाप करने से धन लाभ के प्रबल योग बनते हैं। ग्रहों की स्थिति अनुकूल करने के लिए ‘ऊँ शुं शुक्राय नम:’ जैसे बीज मंत्र और धन के भंडार भरने के लिए “ऊँ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये…” जैसे विशेष मंत्रों का सहारा लिया जाता है। ये मंत्र जातक की चिंताओं को दूर कर उसे मानसिक और आर्थिक मजबूती प्रदान करते हैं।
कैसे करें सफल पूजन? इन नियमों का रखें खास ध्यान
अगर आप चाहते हैं कि मां लक्ष्मी आपके घर में स्थायी निवास करें, तो शुक्रवार की पूजा विधि पर विशेष ध्यान दें। सुबह स्नान के बाद गुलाबी या सफेद वस्त्र धारण करना शुभ होता है, क्योंकि ये रंग माता को अत्यंत प्रिय हैं। पूजा की थाली में कमल या गुलाब के फूल जरूर रखें और शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। भोग के रूप में मिश्री और चावल की खीर का अर्पण करना न भूलें। शाम को दोबारा आरती के बाद प्रसाद बांटना और पूरे दिन खट्टी चीजों के सेवन से बचना इस व्रत की सफलता की मुख्य शर्त मानी जाती है।
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