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Ganga Saptami 2025: गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा कब हैं, इसे माना जाता है पवित्रता और मोक्ष का उत्सव

On: अप्रैल 26, 2025 7:48 अपराह्न
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Ganga Saptami 2025: गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा कब हैं, इसे माना जाता है पवित्रता और मोक्ष का उत्सव
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Ganga Saptami 2025 date difference between Ganga Dussehra in Hindi: हिंदू संस्कृति में मां गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि जीवनदायिनी और पापमोचनी माता के रूप में पूजा जाता है। गंगा के पवित्र जल में स्नान करने की मान्यता है कि यह हर प्रकार के पापों को धो देता है और आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाता है।

गंगा की महिमा को समर्पित दो विशेष पर्व हैं गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा। हालांकि दोनों ही अवसर मां गंगा की अराधना के लिए हैं, लेकिन इनका महत्व, कथाएं और तिथियां अलग-अलग हैं। आइए, इन पवित्र पर्वों की गहराई में उतरकर समझते हैं कि ये क्यों इतने खास हैं और 2025 में इन्हें कब मनाया जाएगा।

Ganga Saptami 2025: गंगा सप्तमी मां गंगा का जन्मोत्सव

गंगा सप्तमी वह शुभ दिन है जब मां गंगा का स्वर्ग में जन्म हुआ था। शास्त्रों के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ब्रह्माजी के कमंडल से मां गंगा का प्राकट्य हुआ। इस दिन को मां गंगा के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

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मान्यता है कि इस दिन मां गंगा ने अपने पवित्र जल से स्वर्ग के सभी देवी-देवताओं को शुद्ध किया और प्रभु विष्णु के चरणों को पखारा। यह भी कहा जाता है कि गंगा सप्तमी के दिन ही मां गंगा को विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ।

2025 में गंगा सप्तमी 3 मई, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त मां गंगा की विधिवत पूजा करते हैं, गंगाजल से अभिषेक करते हैं और दान-पुण्य के कार्यों में हिस्सा लेते हैं। यह दिन आध्यात्मिक शुद्धता और मन की शांति के लिए विशेष माना जाता है।

गंगा दशहरा: पृथ्वी पर गंगा का अवतरण

गंगा दशहरा वह पावन दिन है जब मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व की कथा राजा भागीरथ की तपस्या से जुड़ी है। भागीरथ की कठिन तपस्या के फलस्वरूप मां गंगा धरती पर आईं और उनके पूर्वजों को मुक्ति प्रदान की। यही कारण है कि गंगा दशहरा को पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का दिन माना जाता है।

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2025 में गंगा दशहरा 5 जून, बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। इस दिन लाखों श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है। गंगा दशहरा का स्नान न केवल शारीरिक शुद्धता लाता है, बल्कि आत्मिक पवित्रता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

दोनों पर्वों का आध्यात्मिक महत्व

गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा, दोनों ही पर्व मां गंगा की महिमा को दर्शाते हैं, लेकिन इनका उद्देश्य और प्रभाव अलग-अलग है। गंगा सप्तमी आध्यात्मिक शुद्धता और मां गंगा के जन्म की खुशी का प्रतीक है, जबकि गंगा दशहरा पृथ्वी पर उनके अवतरण और मानव कल्याण के लिए उनके योगदान का उत्सव है। दोनों ही दिन भक्तों के लिए विशेष हैं, क्योंकि गंगा का जल पवित्रता और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है।

गंगा सप्तमी के दिन पूजा, जप और दान से जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि आती है। वहीं, गंगा दशहरा पर गंगा स्नान और पूजा से पापों का नाश होता है। इन पर्वों के दौरान गंगा तटों पर भजन-कीर्तन, हवन और सामूहिक पूजा का आयोजन होता है, जो भक्तों को एकजुट करता है।

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गंगा की महिमा और आधुनिक समय

आज के दौर में भी गंगा की महिमा कम नहीं हुई है। गंगा नदी न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा जैसे पर्व हमें न केवल अपनी आस्था से जोड़ते हैं, बल्कि गंगा की स्वच्छता और संरक्षण के प्रति भी जागरूक करते हैं। भक्तों को चाहिए कि वे इन पर्वों के दौरान नदी की स्वच्छता का ध्यान रखें और प्लास्टिक या अन्य प्रदूषणकारी सामग्रियों से गंगा को दूषित न करें।

गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा हिंदू धर्म के दो अनमोल रत्न हैं, जो हमें मां गंगा की महिमा और उनके प्रति कृतज्ञता का भाव सिखाते हैं। ये पर्व हमें न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भी बोध कराते हैं। 2025 में 3 मई को गंगा सप्तमी और 5 जून को गंगा दशहरा के अवसर पर मां गंगा की पूजा करें, उनके जल में स्नान करें और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करें। मां गंगा का आशीर्वाद आपके जीवन को पवित्रता, शांति और समृद्धि से भर देगा।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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