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Gita Mahotsav: गीता महोत्सव – कुरुक्षेत्र का स्मरण ही पापों से मुक्ति, नाम जपते ही मिलता मोक्ष का वरदान

On: November 10, 2025 7:40 PM
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Gita Mahotsav: गीता महोत्सव - कुरुक्षेत्र का स्मरण ही पापों से मुक्ति, नाम जपते ही मिलता मोक्ष का वरदान
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कुरुक्षेत्र (Gita Mahotsav 2025)। सरस्वती व दृष्दवती नदियों के बीच स्थित धर्म धरा कुरुक्षेत्र को ब्रह्मा की उत्तरवेदी के साथ-साथ वैदिक सभ्यता की क्रीडा स्थली भी माना जाता है। यहां के पवित्र तीर्थों व घाटों के पावन तटों पर ही ऋषियों द्वारा वैदिक साहित्य का सृजन व संकलन किया गया। यही धरा तीर्थराज कुरुक्षेत्र है, जिसका स्कंद पुराण, वामन पुराण, मार्कंडेय पुराण व ब्रह्वैवर्त पुराण सहित अन्य ग्रंथों में भी जिक्र है।

वामन पुराण में उल्लेख है कि अपवित्र हो या पवित्र अथवा किसी भी अवस्था में मनुष्य यदि कुरुक्षेत्र का स्मरण कर ले तो वह पवित्र हो जाता है। वहीं महाभारत में लिखा है…मैं कुरुक्षेत्र जाउंगा तथा कुरुक्षेत्र में निवास करुंगा, जो व्यक्ति इस पर प्रकार भी निरंतर कहता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।

गीता के शाश्वत संदेश की जन्म स्थली कुरुक्षेत्र केवल भूमि ही नहीं बल्कि सर्वोतम तीर्थ स्थल है, जिसे तीर्थराज माना जाता है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मुताबिक स्थानीय मान्यता यह है कि कुरुक्षेत्र का उड़ाया गया धूल का कण किसी महापापी को भी छू जाए तो वह परम गति को प्राप्त हो जाता है।

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यहां आज भी अनेक ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व के पुरातात्विक स्थल है, जिनके उत्खनन से इस भूमि की अनेक संस्कृतियों का पता चलता है। कहा जाता है कि ब्रह्मा ने यहीं से मानव जाति की रचना की थी।

ग्रंथों में कुरुक्षेत्र की अपार महत्ता : स्वामी ज्ञानानंद

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद बताते हैं कि पूरी मानवता के मार्गदर्शन का भगवान श्रीकृष्ण ने इस धरा से शाश्वत संदेश दिया था। यह स्थान न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक व ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। महाभारत और अन्य पौराणिक ग्रंथों में कुरुक्षेत्र की महत्ता दर्ज है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस भूमि की कितनी सार्थकता है। महाभारत के अनुसार पृथ्वी के निवासियों के लिए नैमिष, अंतररिक्षवासियों के लिए पुष्कर और तीनों लोकों के निवासियों के लिए कुरुक्षेत्र विशेष तीर्थ स्थल है।

Gita Mahotsav: ग्रंथों में कुरुक्षेत्र का जिक्र

महाभारत: सरस्वती के दक्षिण तथा दृष्दवती के उत्तर में जो कुरुक्षेत्र में निवास करते हैं वह साक्षात स्वर्ग में निवास करते हैं। पृथ्वी पर तीन लोकों में कुरुक्षेत्र श्रेष्ठ तीर्थ है।

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वामन पुराण: समय पर ग्रह, नक्षत्र एवं ताराओं के भी पतन का भय होता है किंतु कुरुक्षेत्र में मरने वालों का कभी पतन नहीं होता।

मार्कंडेय और सरस्वती कुछ व्याख्याओं के अनुसार, मार्कंडेय ऋषि ने सरस्वती की स्तुति भी की है।

मार्कंडेय पुराण: सरस्वती नदी के किनारे स्थित कुरुक्षेत्र के कई तीर्थों की महिमा का वर्णन है, जैसे कि पिहोवा और अन्य स्थान। मार्कंडेय पुराण में ब्रह्म योनि तीर्थ का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि यहीं से ब्रह्मा ने मानव जाति की रचना की और तपस्या की थी।

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मार्कंडेय पुराण में कुरुक्षेत्र का उल्लेख है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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