Haq Shayari in hindi: हक शायरी इन हिंदी: हक सुनते ही दिल में जोश भर जाता है। हक यानी अपना अधिकार। आजादी की लड़ाई हक की थी – अपने देश पर हक। हक सिर्फ कानूनी नहीं, नैतिक, सामाजिक, इंसानी भी है। बाप-दादा की जमीन पर हक, पढ़ाई पर हक, वोट पर हक… सब हक से चलता है।
लेकिन हक के साथ जिम्मेदारी भी। नैतिकता कहती है – अपना हक मत छोड़ो, दूसरे का मत छीनो। दुनिया के बड़े शायरों ने हक पर गजब के शेर कहे। आइए पढ़ते हैं हक पर शायरी:
कुछ दिन तो मलाल उस का हक़ था Haq Shayari
बिछड़ा तो ख़याल उस का हक़ था
किश्वर नाहीद
बोलते क्यूं नहीं मिरे हक़ में
आबले पड़ गए ज़बान में क्या
जौन एलिया
हक़-परस्ती के सज़ा-वार हुआ करते थे
हम कभी साहब-ए-किरदार हुआ करते थे
ताशी ज़हीर
मुझ को भी हक़ है ज़िंदगानी का
मैं भी किरदार हूं कहानी का
ताहिर अज़ीम
ज़िंदा रहने का हक़ मिलेगा उसे
जिस में मरने का हौसला होगा
सरफ़राज़ अबद
बात हक़ है तो फिर क़ुबूल करो
ये न देखो कि कौन कहता है
दिवाकर राही
सारी गवाहियां तो मिरे हक़ में आ गईं
लेकिन मिरा बयान ही मेरे ख़िलाफ़ था
नफ़स अम्बालवी
Truth Shayari in hindi
चश्म-ए-वहदत से गर कोई देखे
बुत-परस्ती भी हक़-परस्ती है
जोशिश अज़ीमाबादी
हमारे हक़ में दुआ करेगा
वो इक न इक दिन वफ़ा करेगा
नासिर राव
मिरे हक़ में कोई ऐसी दुआ कर
मैं ज़िंदा रह सकूँ तुझ को भुला कर
सीमान नवेद
हक़ वफ़ा के जो हम जताने लगे
आप कुछ कह के मुस्कुराने लगे
अल्ताफ़ हुसैन हाली
वो सूफ़ी कि था ख़िदमत-ए-हक़ में मर्द
मोहब्बत में यकता हमीयत में फ़र्द
अल्लामा इक़बाल
अगर ये शेर पसंद आए तो सोशल मीडिया पर शेयर करें। किसी करीबी को प्राइवेट भी भेज सकते हैं।











