चीन में डॉक्टरों की एक टीम ने मेडिकल साइंस की सीमाओं को आगे बढ़ाते हुए एक महिला का पूरी तरह कटा हुआ कान बचाने में सफलता हासिल की है। इस जटिल मामले में डॉक्टरों ने कान को अस्थायी रूप से महिला के पैर से जोड़कर सुरक्षित रखा और महीनों बाद उसे फिर से सिर पर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया। यह मामला न सिर्फ आधुनिक सर्जरी की ताकत दिखाता है, बल्कि धैर्य और नवाचार का भी उदाहरण है।
क्या हुआ था हादसे के दिन
अप्रैल महीने में चीन के शेडोंग प्रांत में एक फैक्ट्री में काम के दौरान महिला के साथ गंभीर दुर्घटना हुई। मशीन से टकराने के कारण उसका कान पूरी तरह कट गया और सिर, गर्दन तथा चेहरे पर भी गहरी चोटें आईं। घायल अवस्था में जब महिला को जिनान स्थित शेडोंग प्रांतीय अस्पताल लाया गया, तब डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि कान को कैसे जीवित रखा जाए।
तुरंत कान जोड़ना क्यों संभव नहीं था
शुरुआती जांच में पता चला कि सिर की त्वचा और वहां की रक्त नलिकाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं। आमतौर पर ऐसे मामलों में कटे हुए अंग को तुरंत उसकी जगह पर जोड़ने की कोशिश की जाती है, लेकिन यहां सिर के घाव इतने गंभीर थे कि तुरंत प्रत्यारोपण करने पर कान के खराब होने का खतरा था।
वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन के अनुसार, अगर रक्त प्रवाह सही न हो तो अंग कुछ ही घंटों में नष्ट हो सकता है। इसलिए टीम को एक वैकल्पिक समाधान खोजना पड़ा।
कान को पैर से जोड़ने का फैसला कैसे हुआ
डॉक्टरों ने तय किया कि कान को अस्थायी रूप से महिला के पैर से जोड़ा जाए। इसकी वजह यह थी कि पैर की नसों और धमनियों का आकार कान की नसों से काफी मिलता जुलता होता है। इसके अलावा पैर की त्वचा की मोटाई भी सिर की त्वचा जैसी होती है, जिससे बाद में कान को वापस सिर पर जोड़ना आसान हो जाता है।
यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यही सबसे सुरक्षित विकल्प था।
10 घंटे की लंबी और कठिन सर्जरी
पहली सर्जरी करीब 10 घंटे तक चली। इस दौरान सबसे चुनौतीपूर्ण काम था बेहद पतली रक्त नलिकाओं को जोड़ना, जिनका व्यास केवल 0.2 से 0.3 मिलीमीटर था। सर्जरी के बाद शुरुआती दिनों में कान में रक्त संचार की समस्या आई और उसका रंग गहरा पड़ने लगा।
कान को जीवित रखने के लिए दिन रात मेहनत
डॉक्टरों ने हार नहीं मानी। अगले पांच दिनों में लगभग 500 बार हाथ से खून निकालने की प्रक्रिया की गई, ताकि सही रक्त प्रवाह बना रहे। साथ ही महिला के सिर की चोटों का इलाज भी लगातार चलता रहा। सिर के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने के लिए पेट से ली गई त्वचा का प्रत्यारोपण किया गया।
महीनों बाद मिला सफलता का परिणाम
कई महीनों की देखभाल, निगरानी और रिकवरी के बाद डॉक्टरों ने कान को उसकी असली जगह यानी सिर पर सफलतापूर्वक जोड़ दिया। अब महिला का कान लगभग सामान्य दिखता है और उसकी संरचना भी सुरक्षित है।
यह मामला क्यों है खास
मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अंग को अस्थायी रूप से शरीर के किसी अन्य हिस्से से जोड़ना माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी का उन्नत रूप है। चीन में इससे पहले भी इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल उंगलियां या त्वचा बचाने के लिए किया गया है, लेकिन कान जैसे जटिल अंग में यह बेहद दुर्लभ माना जाता है।
इसका असर और आगे की राह
यह केस दिखाता है कि सही समय पर लिया गया फैसला और आधुनिक तकनीक मिलकर असंभव को संभव बना सकते हैं। भविष्य में इस तरह की तकनीक गंभीर दुर्घटनाओं में अंग बचाने के लिए नई उम्मीद दे सकती है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनके पास तुरंत प्रत्यारोपण का विकल्प नहीं होता।













