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इज़राइल की सेना ने Android पर लगाया सख्त प्रतिबंध, अब अफसर सिर्फ iPhone ही इस्तेमाल करेंगे

On: नवम्बर 30, 2025 1:36 अपराह्न
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इज़राइल की सेना ने Android पर लगाया सख्त प्रतिबंध, अब अफसर सिर्फ iPhone ही इस्तेमाल करेंगे
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iPhone: इज़राइल ने सुरक्षा मोर्चे पर एक ऐसा फैसला लिया है जिसने वैश्विक स्तर पर सैन्य टेक्नोलॉजी की चर्चा तेज कर दी है। देश की रक्षा सेना IDF (Israel Defense Forces) ने आदेश जारी किया है कि लेफ्टिनेंट कर्नल से ऊपर के सभी अधिकारी अब सरकारी बातचीत और संवेदनशील कम्युनिकेशन के लिए सिर्फ iPhone का उपयोग करेंगे।

यह कदम ऐसे समय आया है जब पिछले महीनों में कई सैन्य अधिकारियों को नकली सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल, हनी-ट्रैप और स्पाईवेयर अटैक के जरिए निशाना बनाए जाने की घटनाएँ सामने आई थीं।

यह फैसला क्यों अहम है?

सैन्य स्तर की साइबर सुरक्षा किसी भी देश के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा होती है। हाल के वर्षों में यह साफ दिखा है कि सूचनाएँ हथियारों से भी अधिक ताकतवर हो गई हैं।
IDF के एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने बताया:

“हमारी सबसे बड़ी चिंता सिर्फ डिवाइस नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे इकोसिस्टम की सुरक्षा है। एक छोटी सी गलती भी बड़े खुफिया नुकसान में बदल सकती है।”

इज़राइल पहले से ही साइबर तकनीक में दुनिया की अग्रणी शक्ति माना जाता है—ऐसे में यह नीति बदलाव दूसरों के लिए संकेत है कि डिजिटल युद्ध तेजी से बदल रहा है।

Android पर क्यों बढ़ा खतरा?

IDF की जांच में सामने आया कि Android प्लेटफ़ॉर्म की कुछ तकनीकी सीमाएँ इसे अधिक संवेदनशील बनाती हैं:

1. ओपन-सोर्स सिस्टम

Android एक खुला सिस्टम है, जहाँ सैकड़ों ब्रांड अपने फोन बनाते हैं।
इस विविधता के चलते:

सुरक्षा पैच सभी डिवाइसों तक एकसमान और समय पर नहीं पहुँचते

थर्ड-पार्टी ऐप्स की एंट्री आसान होती है

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स्पाईवेयर और मैलवेयर सबसे पहले Android को ही निशाना बनाते हैं

2. हनी ट्रैप और फेक अकाउंट्स सबसे बड़ा खतरा

IDF ने हाल ही में पाया कि दुश्मन संगठन नकली प्रोफ़ाइल बनाकर अधिकारियों से बातचीत शुरू करते हैं। जैसे ही विश्वास बढ़ता है, एक मैलिशियस लिंक भेजा जाता है, जिसे खोलते ही फोन में जासूसी सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल हो जाता है।
इन मामलों में Android डिवाइस अधिक प्रभावित पाए गए।

iPhone को ज्यादा सुरक्षित क्यों माना गया?

इज़राइली सेना के अनुसार, iPhone की सुरक्षा पर भरोसा करने के पीछे कई कारण हैं:

1. बंद और नियंत्रित इकोसिस्टम

Apple का सिस्टम “क्लोज्ड” है, यानी:

ऐप्स कठोर सुरक्षा जांच से गुजरते हैं

iOS पर मैलवेयर अटैक बेहद कम सफल होते हैं

एक ही कंपनी हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर दोनों नियंत्रित करती है

2. एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन मजबूत

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iPhone की प्राइवेसी और एन्क्रिप्शन क्षमताएँ IDF की रक्षा आवश्यकताओं से मेल खाती हैं।

3. लगातार मॉनिटरिंग और समय पर अपडेट

Apple सुरक्षा अपडेट तुरंत रोल आउट करता है, जिससे खतरों का जोखिम घटता है।

Google Pixel भी पास नहीं हुआ टेस्ट

दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में Google ने अपने Pixel फोन को दुनिया के सबसे सुरक्षित स्मार्टफोनों में एक बताया था।
यहां तक कि इसे US Department of Defense की सूची में भी जगह मिली।
लेकिन IDF की जांच में Pixel भी सैन्य-स्तर की सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरा।
सेना ने स्पष्ट कर दिया कि सरकारी उपयोग के लिए iPhone ही सबसे विश्वसनीय विकल्प है।

पहले दी गई ट्रेनिंग और नया प्रोटोकॉल

इस फैसले से पहले IDF कई महीनों से अपने अधिकारियों को साइबर जोखिमों से बचने की ट्रेनिंग दे रही थी:

नकली सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल पहचानने का अभ्यास

हनी-ट्रैप सिमुलेशन

संदिग्ध लिंक और फाइलों को पहचानने की ट्रेनिंग

अब नए नियम स्पष्ट हैं:

अधिकारी निजी रूप से Android रख सकते हैं
लेकिन किसी भी आधिकारिक काम, लोकेशन अपडेट या गोपनीय बातचीत के लिए Android का सख्त इस्तेमाल नहीं

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सेना के द्वारा जारी किए जाने वाले सभी आधिकारिक फोन अब iPhone ही होंगे।

यह फैसला दुनिया के लिए क्या संकेत देता है?

साइबर युद्ध का दौर तेज हो चुका है। हथियारों से पहले अब डेटा चुराने की कोशिश होती है।
इज़राइल का यह कदम बताता है कि:

सैन्य संस्थाओं को अब डिवाइस की ब्रांडिंग नहीं, बल्कि सुरक्षा प्राथमिकता है

मल्टी-ब्रांड Android सिस्टम पर निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है

हाई-लेवल सुरक्षा के लिए कंट्रोल्ड इकोसिस्टम अधिक भरोसेमंद माना जा रहा है

कई विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में अन्य देशों की सेनाएँ भी इसी तरह के सुरक्षा प्रोटोकॉल अपना सकती हैं।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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