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कोल्लम का अनोखा मंदिर जहां पुरुष महिला वेश में करते हैं देवी पूजा

On: December 25, 2025 1:23 PM
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कोल्लम का अनोखा मंदिर जहां पुरुष महिला वेश में करते हैं देवी पूजा
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केरल के कोल्लम जिले में स्थित कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर अपनी एक विशिष्ट धार्मिक परंपरा के कारण देश और विदेश दोनों में चर्चा का विषय बना रहता है। यहां देवी भगवती की पूजा का तरीका भारत के अन्य मंदिरों से बिल्कुल अलग है। इस मंदिर में देवी की आराधना करने से पहले पुरुष श्रद्धालुओं का महिलाओं की तरह श्रृंगार करना परंपरा का अहम हिस्सा है। यह परंपरा न केवल आस्था बल्कि सामाजिक समावेश और सांस्कृतिक विविधता का भी प्रतीक मानी जाती है।

क्या है चमायाविलक्कू अनुष्ठान

इस मंदिर की सबसे प्रसिद्ध परंपरा चमायाविलक्कू कहलाती है। इस अनुष्ठान में पुरुष श्रद्धालु साड़ी पहनते हैं, चूड़ियां, बिंदी और पारंपरिक आभूषण धारण करते हैं और फिर देवी दुर्गा के रूप में पूजित भगवती अम्मा की आराधना करते हैं।
यह अनुष्ठान हर वर्ष 23 और 24 मार्च को आयोजित होता है, जिसमें केरल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, यह परंपरा देवी को समर्पण और अहंकार के त्याग का प्रतीक है, जहां भक्त अपनी पहचान से ऊपर उठकर केवल श्रद्धा के भाव से पूजा करता है।

क्यों निभाई जाती है यह परंपरा

स्थानीय मान्यता है कि देवी भगवती अपने भक्तों की भावना देखती हैं, न कि उनका रूप। माना जाता है कि जो पुरुष इस अनुष्ठान में पूरे विधि विधान से शामिल होते हैं, उनकी मनोकामनाएं जैसे नौकरी, विवाह, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख जल्दी पूर्ण होती हैं।

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केरल के सांस्कृतिक इतिहास पर शोध करने वाले एक विद्वान बताते हैं कि यह परंपरा सदियों पुरानी है और समाज में लैंगिक समानता और स्वीकार्यता की भावना को भी दर्शाती है।

मंदिर की संरचना भी है अलग

कोट्टनकुलंगरा मंदिर अपनी वास्तुकला के कारण भी विशिष्ट है।

  • गर्भगृह में न तो छत है और न ही कलश

  • यह केरल का एकमात्र मंदिर माना जाता है जहां यह संरचना देखने को मिलती है

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  • श्रद्धालुओं का विश्वास है कि देवी की प्रतिमा का आकार हर वर्ष कुछ इंच बढ़ता है, जिसे चमत्कार के रूप में देखा जाता है

हालांकि पुरातत्व विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक पत्थर की संरचना और मौसम के प्रभाव से जोड़कर देखते हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था आज भी अटूट है।

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं

मंदिर की स्थापना को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं।
एक कथा के अनुसार, वर्षों पहले कुछ चरवाहों ने यहां एक पत्थर को महिलाओं के रूप में सजाकर फूल चढ़ाए थे, जिसके बाद वहां दिव्य शक्ति का अनुभव हुआ।
दूसरी मान्यता के अनुसार, जब एक पत्थर पर नारियल फोड़ा गया तो उसमें से रक्त जैसा द्रव निकला, जिससे लोगों में भय और श्रद्धा दोनों उत्पन्न हुए और पूजा की शुरुआत हुई।

इतिहासकार मानते हैं कि इन कथाओं ने इस स्थान को धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई।

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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम

आज के समय में मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में विशेष मेकअप कक्ष बनवाए हैं। यहां पुरुष श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के श्रृंगार कर सकते हैं।
यह व्यवस्था इस बात को दर्शाती है कि परंपरा के साथ साथ आधुनिक जरूरतों का भी ध्यान रखा जा रहा है।

क्यों है यह परंपरा आज भी प्रासंगिक

कोट्टनकुलंगरा मंदिर की यह परंपरा बताती है कि भारतीय संस्कृति में भक्ति का स्वरूप कितना व्यापक और समावेशी रहा है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, समानता और सांस्कृतिक स्वतंत्रता का जीवंत उदाहरण है। यही कारण है कि यह मंदिर हर साल नई पीढ़ी और शोधकर्ताओं को भी आकर्षित करता है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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