Lunar and Solar Eclipse 2025 When and where will the second eclipse of the year be visible? Know the date, time and Sutak period: ग्रहण, चाहे वह चंद्र हो या सूर्य, ज्योतिष और खगोल विज्ञान में विशेष महत्व रखता है। ये खगोलीय घटनाएं न केवल प्रकृति का अद्भुत नजारा होती हैं, बल्कि इनका प्रभाव 12 राशियों के लोगों के जीवन पर भी पड़ता है। साल 2025 में पहला सूर्य ग्रहण 14 मार्च और पहला चंद्र ग्रहण 29 मार्च को हुआ था, लेकिन ये दोनों भारत में दिखाई नहीं दिए। अब सभी की नजरें साल के दूसरे चंद्र और सूर्य ग्रहण पर टिकी हैं। यह ग्रहण कब और कहां दिखेगा? क्या सूतक काल मान्य होगा? आइए, इन सवालों के जवाब विस्तार से जानते हैं।
Lunar and Solar Eclipse 2025: साल 2025 का दूसरा चंद्र ग्रहण तिथि और समय
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 2025 का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को लगेगा। यह भाद्रपद पूर्णिमा का दिन होगा, जो धार्मिक दृष्टिकोण से भी खास है। भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण रात 9:57 बजे शुरू होगा और 8 सितंबर को रात 12:23 बजे तक रहेगा। इसकी कुल अवधि लगभग 2 घंटे 26 मिनट होगी। चूंकि यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, यह खगोल प्रेमियों और ज्योतिष अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना होगी।
चंद्र ग्रहण और सूतक काल
यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, जिसके कारण सूतक काल भी मान्य होगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल वह समय होता है, जब ग्रहण से पहले कुछ धार्मिक और दैनिक गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है। चंद्र ग्रहण का सूतक काल आमतौर पर ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू होता है। इस दौरान मंदिरों में पूजा, नए कार्यों की शुरुआत, और खाना बनाने जैसे कामों से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सूतक काल के नियमों का पालन करने से नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है।
साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण: तिथि और समय
2025 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को लगेगा, जो अश्विन अमावस्या के दिन होगा। यह ग्रहण 21 सितंबर को सुबह 11:00 बजे शुरू होगा और 22 सितंबर को देर रात 3:24 बजे तक चलेगा। इसकी कुल अवधि लगभग 16 घंटे होगी, जो इसे एक लंबा ग्रहण बनाता है। यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा, जो खगोलीय दृष्टिकोण से रोमांचक होगा।
सूर्य ग्रहण और सूतक काल
दुर्भाग्यवश, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, प्रशांत महासागर, और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में नजर आएगा। चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। हिंदू मान्यताओं में, सूतक काल केवल तभी लागू होता है, जब ग्रहण उस क्षेत्र में दृश्य हो। हालांकि, ज्योतिषीय प्रभावों को देखते हुए कुछ राशियों पर इसका असर पड़ सकता है, जिसके लिए ज्योतिषी से सलाह लेना बेहतर होगा।
ग्रहण का ज्योतिषीय और वैज्ञानिक महत्व
ज्योतिष में ग्रहण को एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है, क्योंकि यह राशियों, ग्रहों, और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रभाव डालता है। कुछ राशियों के लिए यह ग्रहण सकारात्मक बदलाव ला सकता है, जबकि कुछ के लिए सावधानी बरतने का समय हो सकता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, ग्रहण सूर्य, चंद्रमा, और पृथ्वी की विशेष स्थिति का परिणाम है, जो खगोल विज्ञान के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है। यह खगोल प्रेमियों के लिए तारों और ग्रहों की गतिविधियों को समझने का शानदार अवसर है।
ग्रहण के दौरान सावधानियां
चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल के नियमों का पालन करें। ग्रहण के समय चंद्रमा को नंगी आंखों से देखने से बचें और सुरक्षित चश्मे का उपयोग करें। सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन अगर आप इसे अन्य देशों में देख रहे हैं, तो सूर्य की किरणों से आंखों को बचाने के लिए विशेष सोलर ग्लासेज पहनें। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर में रहने और मंत्र जाप करने की सलाह दी जाती है।
एक खगोलीय उत्सव की तैयारी करें
2025 के दूसरे चंद्र और सूर्य ग्रहण खगोल और ज्योतिष के शौकीनों के लिए रोमांचक अवसर हैं। 7 सितंबर का चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा, इसलिए सूतक काल के नियमों का ध्यान रखें। वहीं, 21 सितंबर का सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, लेकिन इसका ज्योतिषीय प्रभाव हो सकता है। इन खगोलीय घटनाओं को समझें और अपनी राशि के लिए ज्योतिषीय सलाह लें।
नोट: यह जानकारी (Lunar and Solar Eclipse 2025) ज्योतिषीय और खगोलीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत सलाह के लिए ज्योतिषी या खगोलशास्त्री से संपर्क करें।












