Pitru Paksha 2025, चंडीगढ़ : हिंदू धर्म में पितृपक्ष का खास महत्व है। यह समय पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष देने के लिए समर्पित है। पिंडदान और श्राद्ध से न केवल पितरों का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि घर-परिवार में सुख-समृद्धि भी आती है। साल 2025 में पितृपक्ष 7 सितंबर, रविवार से शुरू हो रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ खास परिस्थितियों में लोग जीवित रहते हुए भी अपना पिंडदान करते हैं? इसे आत्म पिंडदान या जीवित पिंडदान कहते हैं। आइए जानते हैं इसका महत्व और प्रक्रिया।
गरुड़ पुराण में क्या है मान्यता?
गरुड़ पुराण के अनुसार, पिंडदान मृत पूर्वजों के लिए किया जाता है ताकि उनकी आत्मा को पितृलोक में शांति मिले और पितृदोष से मुक्ति हो। पितृपक्ष में श्राद्ध और पिंडदान इसलिए खास है क्योंकि मान्यता है कि इस दौरान हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और सही श्राद्ध से उनकी आत्मा तृप्त होती है। जीवित पिंडदान करने से व्यक्ति अपने पिछले कर्मों के दोषों से मुक्त हो सकता है और जीवन में सुख-समृद्धि पा सकता है। यह आत्म-शुद्धिकरण और पितृऋण से मुक्ति का एक खास उपाय माना जाता है।
आत्म पिंडदान क्यों है जरूरी?
आत्म पिंडदान का मकसद है मृत्यु से पहले अपनी आत्मा को शुद्ध करना ताकि मृत्यु के बाद परिवार पर कोई बाधा न आए। यह कर्म उन लोगों के लिए खास है जो बार-बार असफलता, स्वास्थ्य समस्याओं या आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। यह एक तरह से अपने कर्मों का हिसाब चुकाने और जीवन को बेहतर बनाने का तरीका है।
जीवित पिंडदान कब और कहां करें?
पितृदोष के कारण अगर जीवन में बार-बार रुकावटें आ रही हों, तो जीवित पिंडदान एक प्रभावी उपाय हो सकता है। बिहार के गया में फल्गु नदी के तट पर विष्णुपद मंदिर के पास यह प्रथा खास तौर पर प्रचलित है। इसके अलावा हरिद्वार, प्रयागराज और त्र्यंबकेश्वर जैसे तीर्थस्थलों पर भी जीवित पिंडदान किया जा सकता है। यह कर्म जीवन के पापों से मुक्ति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए किया जाता है।
तर्पण और पिंडदान की प्रक्रिया
पिंडदान में तिल, जौ और चावल से बने पिंड जल में अर्पित किए जाते हैं। तर्पण के दौरान भगवान विष्णु, यमराज और पितरों का ध्यान किया जाता है। इस समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे मंत्रों या पितृ तर्पण मंत्रों का जाप होता है। पिंडदान के बाद गाय, ब्राह्मणों या गरीबों को अन्न, वस्त्र, तिल या स्वर्ण का दान दिया जाता है।
नोट: यह जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है। हरियाणा न्यूज पोस्ट इसकी पुष्टि नहीं करता।











