इस वर्ष देवउठनी एकादशी के बाद शुरू हुआ विवाह सीजन केवल कुछ दिनों तक ही चला। ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुक्र ग्रह के अस्त होने और खरमास लगने के कारण लगभग 52 दिन तक विवाह और अन्य शुभ कार्य नहीं होंगे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह अवधि 16 दिसंबर से 31 जनवरी तक सक्रिय रहेगी, जबकि 5 फरवरी 2026 से मांगलिक आयोजनों की वापसी होगी।
खरमास और शुक्र अस्त क्यों महत्वपूर्ण माने जाते हैं
वेदिक पंचांग के अनुसार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है तो खरमास की शुरुआत होती है, जिसे शास्त्रों में निषेध काल कहा गया है। इस दौरान
विवाह
गृह प्रवेश
नामकरण
भूमि पूजन
यज्ञोपवित
जैसे कार्य शुभ नहीं माने जाते।
ज्योतिषाचार्य बताते हैं
“खरमास में सूर्य की गति मंद होती है और ग्रह प्रभाव कमजोर होता है। ऐसे समय में सकारात्मक कार्यों का फल अपेक्षित नहीं होता।”
इस बार खरमास 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगा। 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और शुभ कार्य दोबारा शुरू होंगे।
शुक्र ग्रह के अस्त होने से विवाह में विराम
पंडितों के अनुसार विवाह के लिए शुक्र और बृहस्पति का उदय होना अनिवार्य होता है।
शुक्र का अस्त काल 12 दिसंबर से 31 जनवरी तक माना गया है।
इसके बाद ग्रह 1 फरवरी को फिर उदित होगा।
इसी कारण जनवरी 2026 में एक भी विवाह मुहूर्त नहीं होगा, और शहनाइयां लगभग दो महीने के लिए शांत रहेंगी।
ज्योतिषाचार्य रमण वत्स कहते हैं
“शुक्र अस्त होने पर वैवाहिक जीवन और सौभाग्य के प्रतीक ग्रह की स्थिति कमजोर होती है। इसलिए विवाह संस्कार स्थगित किए जाते हैं।”
2026 के प्रमुख विवाह मुहूर्त
5 फरवरी 2026 से मंगल कार्यों की शुरुआत होगी। विवाह सीजन के लिए जिन तिथियों को शुभ माना गया है, वे इस प्रकार हैं:
फरवरी
5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21
मार्च
7, 8, 9, 11, 12
अप्रैल
15, 20, 21, 23, 25, 26, 27, 28, 29, 30
मई
1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14
जून
21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29
जुलाई
1, 6, 7, 11, 12
नवंबर
21, 24, 25, 26
दिसंबर
2, 3, 4, 5, 6
क्यों मायने रखती है यह जानकारी
भारत में अधिकांश विवाह मुहूर्त आधारित होते हैं।
ऐसे में
शादी की तारीख
स्थल बुकिंग
परिवारिक व्यवस्थाएं
यात्रा योजना
सब कुछ ग्रह स्थितियों से प्रभावित होता है।
इसलिए यह निर्णय शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लाखों परिवारों के आयोजन समय पर असर डालता है।











