Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas Shayari: भारत का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही कुछ पन्नों में दर्द भी समेटे हुए है। 1947 में जब भारत को आजादी मिली, उसी समय देश का बंटवारा भी हुआ। यह बंटवारा लाखों लोगों के लिए दुख और पीड़ा का सबब बना। इस दर्द को याद रखने और उससे सबक लेने के लिए हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें बताता है कि नफरत और बंटवारे का रास्ता केवल तबाही लाता है। यह हमें इंसानियत, भाईचारे और एकता की अहमियत सिखाता है, ताकि हम फिर कभी ऐसी गलती न दोहराएं।
Vibhajan Vibhishika Smriti Diwas Shayari: करूण कहानी विभाजन
– अरविन्द सीसोदिया
करुण कहानी विभाजन की, हे वीरों तुम्हे पुकारती ,
जाग उठो अब – जाग उठो अब, बनाओ अखंड भारती ,
चीख रही थी तब मानवता, पर चिंघाड़ रही थी दानवी ,
खून से लथपथ वे मंजर,कंप-कप़ी आज भी छुडाते हैं ,
स्वतन्त्रता की वेदी पर, तब नरमूंडों से हुई थी आरती!!
पंजाब बटा,बंगाल बटा , सिंध गया, बलूच गया,
भारत माँ को काट दिया, बेदर्दी से हत्यारों ने,
रावी की शपथ मौन थी, अखंडता का वचन गोण था,
सोच समझ का समय नहीं , भागो-भागो मची देश में,
गैर रहे न बचें , इस शैतानीं में , पाक में नपाक हेवानीं थी ,
घरों पर हमले हुए, जिन्दा जलाये , क़त्ल हुए ,
भूखे – प्यासे राहों में भटके, खूब थके और खूब मरे ,
व्यवस्थित कोई बात न थी, अदला – बदली की सोगात न थी,
न राह दिखानेवाला, न कोई बचानेवाला,
गुंडों की गुंडागर्दी ही तब राज बनीं थी, ताज बनीं थी ,
माता बहिनों की मत पूछो, क्या – क्या उन पर जुल्म हुए,
लाज गई, वेलाज हुईं, तार तार शर्मसार हुईं ,
कितनीं थीं वे जो आ पाईं , कितनीं थी वे जो नहीं आ पाईं ,
किसीने भी नहीं उनकी सूधली , एक तरफ़ा व्यभिचार के मद में ,
हर साँस और सिसकी को ,उस समय चक्र ने घेरा था ,
बेबस चीखें, आज भी गूंजती हैं, नीरव श्मसानों में ,
दर्द था पर राहत नहीं थी, घाव था पर पट्टी नही थी ,
राह थी पर अंत नही था, पथ पर चलते जाना था… ,
कब भारतमाँ का आँचल मिले, हर सांस इसी में विकल थी ,
कुछ आये,कुछ राह में रह गए,कुछ को चलने दिया नहीं,
वे दृश्य वे मंजर , वे चीत्कारें , फिरसे दुनिया में न आयें ,
बार बार मानवता यह पुकारती ,
यह भीषण कथानक है , जो सुनाने में नहीं आता है ,
गाँव – गावं ख़तम हुए थे, शहर – शहर वीरान हुए थे ,
सोना चांदी रुपया पैसा, जमीन और जायदादें….,
लूट सकता था वह सब लूट लिया शैतानों नें ,
खून से लिखी इबारतें वे , छलकी आखें पढ़ नही पाती हैं ,
कहीं दया का दरिया नही था, ममता कहीं मिलती नहीं थी ,
सब को अपना माने …, वह आंचल वह गिरेवान नहीं थे ,
एक भारत भूमि जिसने,सब को सदियों से अपना माना ,
अपना दामन दिया सभी को , अपनीं गोदी दी सबको ,
सबको अपनापन दिया , सबको सुख शांती दी ,
पर उसके बेटों को दुत्कार क्यूँ फटकार क्यूँ …?
हर मुल्क बने भारत जैसा , यही विश्व भारती पुकारती |
न फूल चढ़े और न दीप जले, न उनकी कोई कहानीं है,
हे अनाम शहीदों, तुमने खूब लड़ी लडाई और दी कुर्बानी है ,
नत मस्तक है माँ भारती , गर्व करती माँ भारती ,
नाज तुम पर सदा रहेगा, तुम हो नव युग कि आरती ,
माफ़ करो हे वीरों , खण्डित हे माँ भारती ..!!
देश आजाद हुआ है लेकिन, अखंडता लानी है बाक़ी …. |
फिर कोई राणा प्रताप बनों , या बनों वीर शिवाजी ,
सुभाष , भगत सिंह , चंदशेखर , माता तुमें बुलाती ,
षड्यंत्रों नें हमको मारा , कमजोरी से देश है हारा ,
आपसी फूट मिटाना होगा, दिल में जनून जगाना होगा ,
बंद मुट्ठी करके लें द्रढ़ संकल्प, राह बनायेंगे , चाह बनायेंगे ,
विभाजन को ख़त्म करेंगे, अखंड भारत फिर बनायेंगे ..!
भारत-पाकिस्तान का बंटवारा
1947 में भारत और पाकिस्तान दो अलग-अलग देश बने। इस दौरान करोड़ों लोग अपने घर-बार छोड़ने को मजबूर हुए। कई परिवार बिखर गए, लोग अपने गांव-शहर हमेशा के लिए छोड़कर चले गए। धर्म और जाति के नाम पर हिंसा ने इंसानियत को घायल कर दिया। अनगिनत लोग मारे गए, और लाखों लोगों का जीवन पूरी तरह बदल गया। यह वह दौर था, जब इंसानियत पर गहरे जख्म लगे, जिनके निशान आज भी इतिहास में देखे जा सकते हैं।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का महत्व
साल 2021 में भारत सरकार ने फैसला लिया कि हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा। इसका मकसद उस दर्द को याद रखना है, जो बंटवारे के दौरान लोगों ने झेला। यह दिन हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है। यह नई पीढ़ी को सिखाता है कि नफरत और हिंसा से सिर्फ नुकसान होता है। इस दिन देशभर में लोग उस दौर की कहानियों को याद करते हैं और एकजुटता का संकल्प लेते हैं।
एकता ही देश की ताकत
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर स्कूलों और कॉलेजों में खास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पुराने फोटो, दस्तावेज और बंटवारे के पीड़ितों की कहानियां दिखाई जाती हैं। नाटक, कविताएं और शायरी के जरिए उस दौर की त्रासदी को याद किया जाता है। यह दिन हमें सिखाता है कि देश की असली ताकत उसकी एकता, प्यार और शांति में है। आइए, इस 14 अगस्त 2025 को हम सब मिलकर एकजुटता का संदेश फैलाएं और अपने देश को और मजबूत बनाएं।













