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दिसंबर 2025 में साल की आखिरी कालाष्टमी कब है और क्यों मानी जा रही है खास

On: December 10, 2025 8:22 AM
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दिसंबर 2025 में साल की आखिरी कालाष्टमी कब है और क्यों मानी जा रही है खास
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सनातन परंपरा में कालाष्टमी को ऐसा अवसर माना जाता है जब भक्त भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप भगवान काल भैरव की विशेष आराधना करते हैं। माना जाता है कि यह तिथि नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने, भय को कम करने और जीवन में सुरक्षा व संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत शुभ होती है। वर्ष 2025 की आखिरी कालाष्टमी दिसंबर महीने में पड़ रही है और पंचांग के अनुसार इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है।

दिसंबर 2025 में कालाष्टमी की तिथि और समय

  • अष्टमी तिथि शुरू
    11 दिसंबर 2025 गुरुवार दोपहर 1 बजकर 58 मिनट

  • अष्टमी तिथि समाप्त
    12 दिसंबर 2025 शुक्रवार सुबह 2 बजकर 57 मिनट

उदयातिथि और निशीथ काल की प्रधानता को देखते हुए कालाष्टमी व्रत 11 दिसंबर 2025 गुरुवार को मनाया जाएगा। इसी दिन भक्त भगवान काल भैरव की आराधना करेंगे।

पंडित आचार्य विवेक मिश्रा के अनुसार, रात का समय काल भैरव की उपासना के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है क्योंकि यह संकल्प शक्ति को मजबूत करता है और साधक को मानसिक शांति देता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

हालांकि कालाष्टमी पर रात्रि पूजा का विशेष महत्व है, लेकिन दिन के समय भी शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहता है।

  • अभिजीत मुहूर्त
    सुबह 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट

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कालाष्टमी पूजा कैसे करें

छोटे छोटे चरणों में पूजा करने से साधना सरल और फलदायी मानी जाती है।

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।

  2. पूजा स्थान पर भगवान शिव, माता पार्वती और काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  3. रात के समय दीपक और धूप जलाकर काल भैरव की पूजा करें।

  4. भगवान को काले तिल, नारियल, पुष्प, धूप, तेल का दीपक, और नैवेद्य अर्पित करें।

  5. काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए भैरव अष्टक और उनके विशेष मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है।

  6. अंत में आरती कर जीवन से भय और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें।

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धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से कालाष्टमी का व्रत रखने वाले लोगों में निर्णय क्षमता बढ़ती है और मानसिक दृढ़ता विकसित होती है।

कालाष्टमी का महत्व क्यों बढ़ जाता है

काल भैरव को ब्रह्मांड का दंडाधिकारी माना गया है। वे समय, सुरक्षा और अनुशासन के देवता माने जाते हैं।
ज्योतिष के अनुसार, इस दिन पूजा करने से इन समस्याओं में राहत मिल सकती है:

  • पितृदोष के प्रभाव

  • कालसर्प दोष

  • शनि से संबंधित बाधाएं

  • शत्रु भय और मानसिक अस्थिरता

इसके अलावा, मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा और व्रत जैसी आध्यात्मिक प्रक्रियाएं व्यक्ति के भीतर शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं, जिससे तनाव कम होता है।

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कालाष्टमी पर किए जाने वाले विशेष उपाय

नींबू अर्पण

कालसर्प दोष या ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए काल भैरव मंदिर में नींबू चढ़ाना शुभ माना जाता है।

सरसों के तेल का दीपक

रात्रि समय सरसों के तेल का दीपक जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और मन स्थिर होता है।

काले कुत्ते को भोजन

काले कुत्ते को भगवान भैरव का वाहन माना गया है। उसे भोजन करवाना दया और करुणा का प्रतीक है और इससे भक्त की मनोकामनाओं में तेजी से सिद्धि प्राप्त होने का विश्वास है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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