डिजिटल डेस्क, अंबाला: मंगलवार को अंबाला में बारिश के साथ सुबह 11.15 बजे ओले गिरे। बारिश के साथ ओले करीब 10 मिनट तक गिरे और सड़क सफेद चादर में तब्दील हो गई।
पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बर्फबारी का सीधा असर अब मैदानी इलाकों पर दिखने लगा है। हरियाणा में पिछले कुछ दिनों से धूप तो खिल रही है लेकिन बर्फीली हवाओं ने लोगों की कंपकंपी छुड़ा रखी है।
मौसम विभाग का ताजा अपडेट बताता है कि ठंड से अभी राहत मिलने की उम्मीद कम है। आने वाले दिनों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है जिसके चलते प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और घने कोहरे की वापसी हो सकती है।
धूप के बाद भी क्यों नहीं जा रही ठंड
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पहाड़ों से आ रही उत्तर पश्चिमी हवाएं मैदानी तापमान को गिरा रही हैं। दिन में धूप निकलने के बावजूद हवा में ठंडक बरकरार है। इसे ‘विंड चिल इफेक्ट’ कहा जाता है जिससे तापमान सामान्य रहने पर भी ज्यादा सर्दी महसूस होती है। राज्य के कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है।
प्रमुख शहरों का तापमान मीटर
बीते 24 घंटों में हरियाणा के अलग अलग शहरों में तापमान के आंकड़े इस प्रकार रहे:
हिसार: यहां दिन का अधिकतम तापमान 19.4 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से करीब 2 डिग्री कम है।
अंबाला और फरीदाबाद: इन दोनों शहरों में पारा 20.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
करनाल: यहां तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस रहा।
रोहतक: यहां सबसे ज्यादा सर्दी महसूस की गई और तापमान 18.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
अगले 5 दिनों का मौसम पूर्वानुमान
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए विस्तृत भविष्यवाणी जारी की है।
पश्चिमी विक्षोभ की आहट: 27 जनवरी यानी आज से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसके असर से हवा की दिशा बदलेगी।
गिरेगा पारा: 28 जनवरी को तापमान में फिर से गिरावट देखने को मिल सकती है।
कोहरे का अलर्ट: 29 और 30 जनवरी को राज्य के कई इलाकों में फिर से घना कोहरा और शीत लहर चलने की आशंका है।
बारिश की संभावना: महीने के आखिरी दिन यानी 31 जनवरी को आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। वहीं 1 फरवरी को तेज हवाओं के साथ बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है।
किसानों के लिए क्या है सलाह
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिला जुला मौसम रबी की फसलों के लिए महत्वपूर्ण है।
गेहूं की फसल: हल्की ठंड और ओस गेहूं की फसल में दाना बनने की प्रक्रिया के लिए अच्छी मानी जाती है।
सरसों और सब्जियां: अगर तापमान बहुत ज्यादा गिरता है या पाला पड़ता है तो सरसों और सब्जियों को नुकसान हो सकता है।
सिंचाई: बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को अभी सिंचाई रोकने की सलाह दी जाती है।












