हिसार. हरियाणा में कड़ाके की ठंड के बीच मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पिछले दो दिनों से प्रदेश के ज्यादातर जिलों में सूर्यदेव के दर्शन होने से लोगों को गलन वाली सर्दी से थोड़ी राहत मिली है। सोमवार को भी दिन की शुरुआत हल्की धूप के साथ हुई जिससे पार्कों और घरों की छतों पर लोग धूप सेंकते नजर आए। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह राहत ज्यादा लंबी नहीं है क्योंकि एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने को तैयार है।
पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और प्रभाव
मौसम विभाग के अनुसार पहाड़ों पर सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर मैदानी इलाकों पर देखने को मिलेगा। 19 जनवरी और 20 जनवरी को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके चलते हरियाणा और एनसीआर के कई इलाकों में आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और कहीं कहीं हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है।
हवाओं की दिशा बदलने से धुंध में कमी आई है जिससे सड़कों पर वाहनों की रफ्तार सामान्य हुई है। लेकिन आने वाले दिनों में मौसम फिर से बिगड़ने के आसार बन रहे हैं।
हिसार में सबसे ज्यादा तापमान दर्ज
बीते दो सप्ताह से जारी भीषण शीतलहर के बाद अब तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक हिसार का अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा। वहीं न्यूनतम तापमान भी बढ़कर 8 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। धूप निकलने से दिन के तापमान में यह सुधार देखने को मिला है जिससे आम जनजीवन को थोड़ी राहत महसूस हुई है।
22 जनवरी से बिगड़ सकते हैं हालात
वरिष्ठ मौसम विशेषज्ञ डॉ चंद्रमोहन के अनुसार असली बदलाव 22 जनवरी के बाद देखने को मिलेगा। एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ के आने से जनवरी के अंतिम सप्ताह और फरवरी की शुरुआत में मौसम ज्यादा खराब हो सकता है।
आगे क्या होने की संभावना है:
तेज बारिश: 22 जनवरी के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में मध्यम से तेज बारिश हो सकती है।
ओलावृष्टि: कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है जिससे फसलों को नुकसान हो सकता है।
ठंड की वापसी: बारिश के बाद ठंडी हवाएं चलेंगी जिससे तापमान गिरेगा और सर्दी का एक और दौर शुरू होगा।
किसानों और आम लोगों के लिए सलाह
मौसम में होने वाले इस बदलाव का असर खेती पर भी पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम साफ रहने तक सिंचाई और छिड़काव का काम पूरा कर लें। वहीं ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए अपनी फसलों की निगरानी रखें। आम जनता को भी बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत है क्योंकि दिन में धूप और रात में ठंड बीमार कर सकती है।












