कैथल (Kaithal Weather)। शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स एक्यूआई 163 दर्ज किया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक स्तर माना जाता है। प्रदूषण के कारण जुकाम, खांसी, एलर्जी, जलन और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
Kaithal Weather: कैथल में एक्यूआई 163 पर
स्थिति यह है कि जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना लगभग 1500 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या प्रदूषण से प्रभावित लोगों की है। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में जुकाम, खांसी और एलर्जी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हवा में मौजूद धूलकण, स्मॉग और जहरीले कणों के कारण विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग और अस्थमा के मरीज ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
कई मरीज आंखों में तेज जलन, लालपन और पानी आने की शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण से आंखों की नमी कम हो रही है, जिससे जलन और एलर्जिक रिएक्शन बढ़ रहे हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों में अधिकतर को लगातार खांसी, गले में खराश, सीने में भारीपन और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं हैं।
प्रदूषित हवा कर रही बीमार
डॉक्टरों का कहना है कि इस स्थिति में हवा के स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर पहुंच जाते हैं, जो सीधे फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं। प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और मौसमी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
मास्क का उपयोग करें, सुबह-शाम खुली हवा में घूमने से बचने, घरों में साफ-सफाई और उचित वेंटिलेशन बनाए रखने की अपील की गई है। जिन लोगों को पहले से दमा या एलर्जी की समस्या है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतने और दवाओं का नियमित सेवन करने की सलाह दी गई है।
मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ओपीडी में अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया गया है, ताकि लोगों को समय पर इलाज मिल सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के पुख्ता कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।













