Weather Today: Heavy rain alert in the country for the next 7 days: Winds at the speed of 100 km / h, IMD warning: नई दिल्ली: भारत के कई हिस्सों में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले सात दिनों के लिए देश के कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।
10 जून से पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में झमाझम बारिश की संभावना है, जिसमें कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। इसके साथ ही, 60 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली झोंकेदार हवाएं और गरज-चमक कई क्षेत्रों में मौसम को और प्रभावित करेंगी। लोगों को सावधानी बरतने और मौसम अपडेट्स पर नजर रखने की सलाह दी गई है।Weather Today
पिछले कुछ दिनों से असम, मेघालय, और ओडिशा जैसे राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। IMD के अनुसार, मध्य प्रदेश सहित कई इलाकों में तेज हवाएं दर्ज की गई हैं, और यह सिलसिला अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है।
स्काईमेट वेदर की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पाकिस्तान, उत्तर-पश्चिम राजस्थान, और हरियाणा में चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) सक्रिय है, जो मौसम में बदलाव का कारण बन रहा है। इसके अलावा, उत्तर बांग्लादेश और दक्षिण छत्तीसगढ़ से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक एक ट्रफ रेखा बनी हुई है, जिसके चलते बारिश की गतिविधियां तेज होंगी।
पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, और मेघालय में 10 से 13 जून के बीच, जबकि नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, और त्रिपुरा में 7, 11, और 13 जून को भारी बारिश की चेतावनी है।
दक्षिण भारत में केरल, माहे, और तटीय कर्नाटक में 10 से 13 जून तक हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, और रायलसीमा में भी 7 से 10 जून के दौरान गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भी अगले कुछ दिनों में बारिश और तेज हवाएं देखने को मिल सकती हैं।
उत्तर भारत में उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, और पंजाब जैसे राज्यों में 11 से 13 जून के बीच छिटपुट बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है। IMD ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम की जानकारी नियमित रूप से लेते रहें और बारिश के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें।
यह मौसमी बदलाव न केवल किसानों और आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।












