यमुनानगर (Yamunanagar Air Pollution): प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर का AQI 331 तक पहुंच गया है, जिससे हवा बेहद जहरीली हो चुकी है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यमुनानगर की हवा लगातार खराब होती जा रही है। शहर का AQI 331 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया, जबकि एक दिन पहले यह 289 था। बढ़ते प्रदूषण की वजह से कई लोगों ने दोबारा मास्क पहनना शुरू कर दिया है। तीसरे दिन भी जिले में धुंध छाई रही, धूप बेअसर रही और दृश्यता बेहद कम हो गई।
लोग जहरीली हवा से परेशान हैं, लेकिन जिला प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम अभी तक सामने नहीं आया है।
Yamunanagar Air Pollution: इस बार वजहें अलग
पिछले वर्षों में प्रदूषण के लिए सबसे बड़ा कारण खेतों में जल रहे फसल अवशेषों को माना जाता था, लेकिन इस बार सिर्फ 7 मामले सामने आए और उनमें भी केवल 2 मामलों में अवशेष जलते मिले।
बारिश न होने से पेड़ों पर मोटी धूल जमी है। पहले दमकल विभाग इन पेड़ों पर पानी की बौछार करता था, लेकिन इस बार यह काम भी नहीं हुआ।
स्मॉग से तापमान में भी गिरावट
स्मॉग का असर मौसम पर भी दिखा है। जिले का अधिकतम और न्यूनतम तापमान 1 डिग्री तक गिर गया है। शनिवार को अधिकतम तापमान 25 डिग्री और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
धूप निकलने के बावजूद प्रभावी नहीं दिख रही और ठंड का असर बढ़ने लगा है।
पेड़ों पर पानी का छिड़काव शुरू
जिला दमकल अधिकारी पंकज पराशर ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने के चलते अब पेड़ों पर पानी छिड़कने के आदेश जारी किए गए हैं। बारिश न होने से पत्तों पर धूल जम जाती है, जिससे ऑक्सीजन उत्पादन प्रभावित होता है।
उन्होंने बताया कि छिड़काव का काम शुरू हो चुका है।
शहर में प्रदूषण बढ़ने के तीन बड़े कारण
1. फैक्ट्रियों का धुआं और नियमों की अनदेखी
शहर के औद्योगिक क्षेत्रों में सैकड़ों फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिनमें बायलर लगातार जल रहे हैं। चिमनियों से निकलने वाला काला धुआं साफ दिखाता है कि कई कंपनियां प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन नहीं कर रहीं।
2. कूड़े में आग लगाना बना बड़ा कारण
शहर में जगह-जगह पड़े कूड़े को उठाने की बजाय आग लगा दी जाती है। कई लोग बताते हैं कि सफाई कर्मचारी कूड़ा उठाने के बजाय वहीं जला देते हैं। दुकानदार और लोग भी खाली प्लॉटों में पड़े कूड़े में आग लगाते दिख जाते हैं।
3. सड़कों पर जमी धूल और लगातार दौड़ते डंपर
सड़कों के किनारों पर मोटी धूल जमा है। खनन सामग्री ले जाने वाले डंपर और ट्रक दिनभर दौड़ते रहते हैं, जिनसे रेत गिरती रहती है। वाहन गुजरते ही धूल हवा में उड़कर मिल जाती है।
कई बार धूल इतनी ज्यादा उड़ती है कि कुछ भी साफ दिखाई नहीं देता। पेड़ों के पत्तों पर जमी धूल ऑक्सीजन उत्पादन को भी कम कर रही है।













