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जनवरी की ठंड में किसान करें यह काम, मिर्च और अगेती सब्जियों की खेती से होगी लाखों की कमाई

On: January 15, 2026 9:15 AM
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जनवरी की ठंड में किसान करें यह काम, मिर्च और अगेती सब्जियों की खेती से होगी लाखों की कमाई
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हिसार। जनवरी में मिर्च और अगेती सब्जियों की खेती का सही समय है। एचएयू ने एनपी 46 ए किस्म और लो टनल तकनीक अपनाने की सलाह दी है ताकि बंपर पैदावार मिल सके।

कड़ाके की ठंड का यह मौसम किसानों के लिए केवल रजाई में दुबकने का नहीं बल्कि आने वाले सीजन की तैयारी करने का है। जनवरी और फरवरी का महीना सब्जी उत्पादकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय ‘अगेती खेती’ यानी समय से पहले फसल तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त है। अगर किसान भाई अभी से सही रणनीति अपनाएं तो वे गर्मियों की शुरुआत में ही अपनी फसल बाजार में उतारकर मोटा मुनाफा कमा सकते हैं।

ठंड में कौन सी फसलें लगाएंगी बेड़ा पार

प्रगतिशील किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय दो तरह की फसलों पर फोकस करना चाहिए। पहला वह सब्जियां जो ठंड में ही होती हैं जैसे पालक, मेथी, गाजर, मूली, मटर, गोभी और ब्रोकली।

दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण वह फसलें हैं जो गर्मियों में आती हैं लेकिन उनकी तैयारी अभी करनी होती है। इसमें भिंडी, लौकी, करेला, ककड़ी, टमाटर और बैंगन शामिल हैं। इनकी नर्सरी अभी तैयार करके फरवरी के अंत या मार्च में खेत में रोपाई की जा सकती है।

मिर्च की खेती के लिए एचएयू की खास सलाह

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) हिसार के कुलपति प्रोफेसर बीआर काम्बोज ने मिर्च की खेती करने वाले किसानों के लिए विशेष सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया कि बसंतकालीन मिर्च की फसल के लिए खेत की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। जनवरी महीने के अंत तक मिर्च की रोपाई करना सबसे सही रहता है।

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कौन सी किस्मों का करें चयन

अच्छी पैदावार के लिए बीज का सही चुनाव बहुत जरूरी है। विश्वविद्यालय ने किसानों को निम्नलिखित किस्में प्रयोग करने की सलाह दी है:

  • सामान्य मिर्च: इसके लिए ‘एनपी 46 ए’ या ‘पंत सी 1’ किस्म सबसे बेहतर मानी गई है। एक एकड़ खेत के लिए लगभग 400 ग्राम बीज की जरूरत पड़ती है।

  • शिमला मिर्च: अगर आप शिमला मिर्च लगाना चाहते हैं तो ‘कैलिफोर्निया वंडर’ नामक किस्म का प्रयोग करें। इसके लिए भी प्रति एकड़ 400 ग्राम बीज पर्याप्त होगा।

खेत की तैयारी और रोपाई का वैज्ञानिक तरीका

मिर्च की बंपर पैदावार लेने के लिए खेत की मिट्टी का उपजाऊ होना बहुत जरूरी है। रोपाई से लगभग तीन हफ्ते पहले खेत में 10 टन गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद मिला देनी चाहिए। खेत में जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें और पाटा चलाकर समतल कर लें।

इसके बाद खेत में क्यारियां बना लें। दूरी का रखें ध्यान: रोपाई करते समय कतारों के बीच 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें। वहीं एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए। ध्यान रहे कि शिमला मिर्च के पौधे सामान्य मिर्च के मुकाबले ज्यादा फैलते हैं इसलिए दूरी का विशेष ध्यान रखें।

पाले से बचाने के लिए अपनाएं ‘लो टनल’

जनवरी की ठंड और पाला नन्हें पौधों का सबसे बड़ा दुश्मन है। इससे बचने के लिए ‘लो टनल’ तकनीक अपनानी चाहिए। इसमें पौधों को प्लास्टिक की पारदर्शी चादर से ढका जाता है जिससे अंदर का तापमान गर्म रहता है। यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और फसल समय से पहले तैयार हो जाती है।

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FAQ’s

प्रश्न: जनवरी में मिर्च की कौन सी किस्म लगानी चाहिए?

उत्तर: जनवरी में बसंतकालीन फसल के लिए एनपी 46 ए और पंत सी 1 किस्म सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

प्रश्न: एक एकड़ में मिर्च के कितने बीज की आवश्यकता होती है?

उत्तर: एक एकड़ खेत में मिर्च की खेती के लिए लगभग 400 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

प्रश्न: पौधों को पाले से बचाने के लिए क्या करें?

उत्तर: ठंड और पाले से बचाने के लिए लो टनल तकनीक का प्रयोग करें और बीजों को बीजामृत से उपचारित करें।

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प्रश्न: मिर्च की रोपाई में पौधों की दूरी कितनी होनी चाहिए?

उत्तर: कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।

बीजामृत और आधुनिक तकनीक का प्रयोग

विशेषज्ञों की सलाह है कि बीजों को बोने से पहले उन्हें ‘बीजामृत’ से उपचारित जरूर करें ताकि रोगों से बचाव हो सके। इसके अलावा खेत में 8 से 10 क्विंटल घनजीवामृत और नीम की खली का प्रयोग करने से मिट्टी की सेहत सुधरती है। पानी की बचत और खरपतवार रोकने के लिए ‘ड्रिप इरिगेशन’ (टपक सिंचाई) और ‘मल्चिंग पेपर’ का इस्तेमाल करना आज के दौर की सबसे समझदारी भरी खेती है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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