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Dhan Ki Kheti: धान की फसल में नाइट्रोजन सही समय और तरीका अपनाएं, वरना हो सकता है लाखों का नुकसान

On: August 10, 2025 8:58 AM
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Dhan Ki Kheti: धान की फसल में नाइट्रोजन सही समय और तरीका अपनाएं, वरना हो सकता है लाखों का नुकसान
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Dhan Ki Kheti: Use nitrogen in rice crop at right time and method, otherwise there can be loss of lakhs: (धान की फसल में नाइट्रोजन) का उपयोग अगर सही तरीके से किया जाए तो पैदावार में जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन अगर इसे गलत समय या अधिक मात्रा में दिया जाए, तो नुकसान भी उतना ही बड़ा हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नाइट्रोजन का संतुलित उपयोग ही फसल को स्वस्थ और लाभकारी बनाता है।

नाइट्रोजन पौधों के लिए प्रोटीन निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। यह जड़ों की मजबूती, कल्लों की संख्या और दानों के आकार को प्रभावित करता है। लेकिन इसकी अधिकता से पत्तियां पीली पड़ सकती हैं, किनारे जल सकते हैं और मिट्टी की उर्वरता भी घट सकती है।

कब और कैसे दें नाइट्रोजन? Dhan Ki Kheti

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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पहली बार नाइट्रोजन (nitrogen timing in rice) रोपाई के एक सप्ताह बाद देना चाहिए। इस समय खेत में नमी पर्याप्त होनी चाहिए, ताकि खाद जड़ों तक पहुंचे। नमी इतनी होनी चाहिए कि किसान का पैर खेत में थोड़ा गड़ जाए।

दूसरी बार नाइट्रोजन तब देना चाहिए जब पौधों में कल्ले निकलने लगें। यह समय फसल के विकास के लिए बेहद अहम होता है। इस दौरान नाइट्रोजन देने से कल्ले मजबूत होते हैं और दाने भरपूर बनते हैं।

नाइट्रोजन सुबह या शाम के समय देना चाहिए। तेज धूप में नाइट्रोजन देने से वह वायुमंडल में उड़ जाती है और पौधे उसे ग्रहण नहीं कर पाते। इसी तरह, अगर खेत में पानी भरा हो तो नाइट्रोजन का छिड़काव बिल्कुल न करें।

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नाइट्रोजन की अधिकता से हो सकता है नुकसान

(nitrogen overdose effects) से फसल को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। अधिक नाइट्रोजन से पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और किनारे जलने लगते हैं। इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और पैदावार घट जाती है।

इसके अलावा, नाइट्रोजन पानी में घुलकर वाष्पित हो जाता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण भी होता है। इसलिए जरूरी है कि किसान मृदा परीक्षण कराएं और उसी के आधार पर खाद की मात्रा तय करें।

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(rice crop expert advice) के अनुसार, प्रति हेक्टेयर 100 से 120 किलोग्राम यूरिया पर्याप्त होता है। लेकिन यह मात्रा मिट्टी की उर्वरता, जलवायु और फसल की किस्म पर निर्भर करती है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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