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बाढ़ ने बर्बाद की फसल, अम्बाला के किसानों का 20 हजार प्रति एकड़ नुकसान, मुआवजे की मांग!

On: September 12, 2025 2:48 PM
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बाढ़ ने बर्बाद की फसल, अम्बाला के किसानों का 20 हजार प्रति एकड़ नुकसान, मुआवजे की मांग!
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अम्बाला, Ambala Crop Damage Flood: अम्बाला के शाहपुर और आसपास के गांवों में भारी बारिश और टांगरी नदी के उफान ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में पानी भरने से धान और खरीफ सीजन की अन्य फसलों की जड़ें गल गईं, जिससे लाखों की फसल बर्बाद हो गई। किसान चरणजीत सिंह, हरनेक सिंह, राजेंद्र और सुखबीर सिंह ने बताया कि उनकी धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। बुवाई, खरपतवार, यूरिया और ब्लैक कॉपर स्प्रे जैसे कामों पर प्रति एकड़ 18 से 20 हजार रुपये खर्च हो चुके थे। फसल पकने को थी, लेकिन बाढ़ ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं।

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अम्बाला के किसानों को मुआवजे की आस

प्रदेश सरकार ने फसल नुकसान के लिए मुआवजा पोर्टल खोल दिया है। किसानों को 15 सितंबर तक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद पटवारी खेतों की गिरदावरी करेंगे। तहसीलदार 25% रकबे, SDM 10% और DC 2% की जांच करेंगे। जांच के बाद सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिसके आधार पर मुआवजा मिलेगा। हालांकि, मुआवजा मिलने में समय लग सकता है। किसान मनप्रीत सिंह ने मांग की है कि 100% फसल नुकसान वाले किसानों को 60 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।

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ठेके पर खेती करने वालों का भी नुकसान

बाढ़ ने ठेके पर खेती करने वाले किसानों को भी बड़ा झटका दिया है। किसान रुपिंद्र ने बताया कि वह 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के ठेके पर खेती कर रहे थे, लेकिन फसल बर्बाद होने से उनकी सारी उम्मीदें चकनाचूर हो गईं। 2023 में भी टांगरी नदी के उफान से ऐसा हुआ था, तब किसानों ने दोबारा धान लगाया था। लेकिन इस बार सितंबर की बाढ़ ने कोई मौका नहीं छोड़ा। अगर मौसम साफ रहा, तो 15-20 सितंबर तक कुछ सब्जियां लगाई जा सकती हैं, वरना मुश्किल और बढ़ेगी।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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