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यूरिया और डीएपी का खर्च अब होगा खत्म, सरकारी वेबसाइट से ऑनलाइन मंगवाएं हरी खाद की स्पेशल किट

On: जनवरी 23, 2026 9:24 पूर्वाह्न
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यूरिया और डीएपी का खर्च अब होगा खत्म, सरकारी वेबसाइट से ऑनलाइन मंगवाएं हरी खाद की स्पेशल किट
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नई दिल्ली. किसानों के लिए अच्छी खबर है। राष्ट्रीय बीज निगम ने 833 रुपये में हरी खाद की बीज किट ऑनलाइन बेचना शुरू किया है। इससे मिट्टी की उर्वरता और फसल की पैदावार बढ़ेगी।

खेती में बढ़ती लागत और मिट्टी की कम होती उपजाऊ शक्ति आज किसान भाईयों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। रसायनों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने खेतों को बंजर बनाना शुरू कर दिया है। इस समस्या का सबसे सस्ता और टिकाऊ समाधान ‘हरी खाद’ के रूप में सामने आया है। अब आपको बीज के लिए बाजार में भटकने की जरूरत नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) ने किसानों के लिए घर बैठे ऑनलाइन बीज मंगवाने की सुविधा शुरू कर दी है।

खेती को नया जीवन देती है हरी खाद

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हरी खाद केवल एक फसल नहीं है बल्कि यह मिट्टी के लिए एक टॉनिक का काम करती है। इसमें किसान ढैंचा और मूंग जैसी फसलें उगाते हैं और फूल आने से पहले उन्हें खेत में ही जोतकर मिट्टी में मिला देते हैं। सड़ने के बाद यह पौधे नाइट्रोजन का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत बन जाते हैं। इससे अगली फसल की पैदावार में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है।

सरकारी किट में मिलेंगे 7 तरह के बीज

राष्ट्रीय बीज निगम ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक विशेष ‘सीड किट’ तैयार की है। इस एक किट में आपको अलग अलग तरह की फसलों के बीज मिलते हैं। इसमें मुख्य रूप से ये बीज शामिल हैं

  • ढैंचा

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  • ग्वार

  • सरसों

  • उड़द

  • भिंडी

  • मेथी

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  • गेंदा

इस मिश्रण को वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है ताकि खेत को हर तरह का पोषण मिल सके। दलहनी फसलें नाइट्रोजन फिक्स करती हैं जबकि गेंदा जैसे पौधे मिट्टी से हानिकारक कीड़ों को दूर रखते हैं।

कीमत और ऑनलाइन बुकिंग का तरीका

अगर आप भी अपने खेत की सेहत सुधारना चाहते हैं तो यह किट आपके लिए बहुत किफायती साबित होगी। निगम की वेबसाइट पर 3 किलो 800 ग्राम वजन वाली इस किट की कीमत मात्र 833 रुपये रखी गई है।

किसान भाई एनएससी (National Seeds Corporation) के ऑनलाइन स्टोर पर जाकर इसे ऑर्डर कर सकते हैं। यह बीज सीधे आपके घर पहुंचा दिया जाएगा। रासायनिक खादों के हजारों रुपये के खर्च के मुकाबले यह सौदा काफी सस्ता है।

मिट्टी की सेहत और उपज पर असर

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि हरी खाद के इस्तेमाल से जमीन की जल धारण क्षमता बढ़ जाती है। यानी खेत में नमी ज्यादा दिनों तक बनी रहती है जिससे सिंचाई का खर्च बचता है। आंकड़ों के मुताबिक जो किसान नियमित रूप से हरी खाद का उपयोग करते हैं उनकी फसलों की उपज में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है। यह मिट्टी के कटाव को रोकती है और खरपतवार को नियंत्रित करने में भी मददगार है।

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बुवाई का सही समय और तरीका

हरी खाद लगाने का सबसे सही समय रबी की फसल कटने के बाद और खरीफ की बुवाई से पहले का होता है। जब खेत खाली हो तो हल्की जुताई करके इन बीजों को छिड़क दें। ढैंचा का गणित: एक एकड़ खेत के लिए लगभग 20 से 25 किलो ढैंचा बीज की जरूरत होती है। कब जोतनी है फसल: फसल को पकने का इंतजार न करें। बुवाई के करीब 40 से 45 दिन बाद जब पौधों में फूल आने लगें तो रोटावेटर या हल चलाकर इन्हें खेत की मिट्टी में मिला दें। इसके बाद पानी छोड़ दें ताकि वे सड़कर खाद बन सकें।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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