हिसार और सिरसा जैसे बेल्ट में मछली पालन कर रहे किसानों के लिए नायब सैनी सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बिजली दरों में भारी रियायत दी गई है। जो किसान अब तक गैर-कृषि फीडर से बिजली लेकर मछली पालन कर रहे थे, उन्हें 6.60 रुपये प्रति यूनिट का भारी-भरकम बिल चुकाना पड़ता था। सरकार ने इसे घटाकर अब 4.75 रुपये प्रति यूनिट कर दिया है। इसके साथ ही कनेक्शन की लोड सीमा को भी 20 किलोवाट से दोगुना कर 40 किलोवाट कर दिया गया है, जिससे बड़े तालाबों के लिए बोरवेल चलाना आसान होगा।
खारे पानी वाले सात जिलों के लिए संजीवनी बनेगा ‘मत्स्य पालन’
प्रदेश के झज्जर, भिवानी, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, नूंह और रोहतक जैसे जिलों में जमीन लवणीय (खारी) होने के कारण पारंपरिक खेती मुश्किल हो गई थी। यहां बारिश का पानी भरने से फसलें बर्बाद हो जाती थीं, लेकिन अब किसानों ने इसे अवसर में बदल दिया है। इन जिलों में झींगा मछली (Shrimp) का उत्पादन तेजी से बढ़ा है, जो बाजारों में काफी महंगी बिकती है। सरकार अब इन मछली पालकों को किसान उत्पादक संगठन (FPO) के जरिए कृषि उद्योग का दर्जा देने की तैयारी कर रही है। इससे किसानों को अपनी उपज की बेहतर ब्रांडिंग और मार्केटिंग में मदद मिलेगी।
सब्सिडी के लिए अब नहीं काटने होंगे चक्कर, 40 दिन में आएगा पैसा
हरियाणा अधिकार सेवा अधिनियम 2014 के तहत सरकार ने सब्सिडी वितरण की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी बना दिया है। अब सघन मत्स्य पालन विकास कार्यक्रम के तहत लोडिंग ऑटो, चारपहिया वाहन या मिनी ट्रैक्टर खरीदने वाले किसानों को सब्सिडी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। आवेदन के मात्र 40 दिनों के भीतर सब्सिडी राशि सीधे खाते में भेज दी जाएगी। वहीं, आइस प्लांट लगाने वाले उद्यमियों को 50 दिनों के भीतर वित्तीय सहायता जारी कर दी जाएगी। इस समयबद्ध सेवा से बिचौलियों का खेल खत्म होगा और वास्तविक लाभार्थियों को समय पर लाभ मिलेगा।
बारिश की कमी और बोरवेल की चुनौती का समाधान
जब मानसून कमजोर होता है, तो मछली पालकों के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे समय में बोरवेल ही एकमात्र सहारा बचता है। चूंकि ज्यादातर मछली पालक गैर-कृषि फीडर पर निर्भर हैं, इसलिए सरकार का यह फैसला उनकी लागत को कम करने में गेम-चेंजर साबित होगा। गौरतलब है कि कृषि फीडर से बिजली लेने वाले मछली पालकों को सरकार पहले से ही मात्र 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली दे रही है। अब गैर-कृषि फीडर वाले 5000 परिवारों को राहत देकर सरकार ने नीली क्रांति (Blue Revolution) को नई रफ़्तार दे दी है।
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