Haryana Sahiwal cow Gir breed: NDRI created ‘Shravani’ using cloning technique, a historic success in animal breeding sector: हरियाणा साहीवाल गाय गिर नस्ल की दिशा में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI Karnal) ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। पशु प्रजनन विज्ञान में यह सफलता न केवल तकनीकी विकास को दर्शाती है, बल्कि भारत में उच्च दुग्ध उत्पादन वाली नस्लों के संरक्षण को भी एक नया आयाम देती है।
वैज्ञानिक क्लोनिंग से जन्मी ‘श्रावणी’ Haryana sahiwal cow Gir breed
11 जुलाई को NDRI करनाल में साहीवाल नस्ल की एक गाय ने जिस बछड़ी को जन्म दिया है, वह असल में देश की पहली गिर नस्ल की क्लोन गाय ‘गंगा’ से विकसित भ्रूण से तैयार की गई है। सावन माह में जन्म लेने के कारण बछड़ी का नाम ‘श्रावणी’ रखा गया है।
यह सफलता OPU-IVF (Ovum Pick Up – In Vitro Fertilization) तकनीक की मदद से हासिल की गई। खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने क्लोन व कृत्रिम गर्भाधान तकनीकों से केवल 39 महीनों में ही दो पीढ़ियां तैयार कर दीं, जबकि सामान्य प्रक्रिया में यह कार्य 60 से 84 महीनों तक का समय लेता है।
कौन-कौन रहे वैज्ञानिक सफलता के सूत्रधार
इस सफलता का श्रेय NDRI निदेशक डॉ. धीर सिंह के नेतृत्व में वैज्ञानिक टीम को जाता है। जिनमें प्रमुख तौर पर डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. रंजीत वर्मा, कार्तिकेय पटेल, डॉ. नरेश सेलोकर, डॉ. प्रियंका सिंह और डॉ. नितिन त्यागी शामिल रहे। इन सभी ने भ्रूण विकास से लेकर गाय के गर्भधारण और बछड़ी के जन्म तक तकनीकी बारीकियों को संभालते हुए यह उपलब्धि सुनिश्चित की।
देश को मिलेगी बेहतर दुग्ध क्षमता वाली गायें
NDRI की यह पहल भारत में गिर और साहीवाल जैसी उच्च दुग्ध क्षमता वाली गायों की संख्या बढ़ाने की दिशा में बेहद कारगर साबित हो सकती है।
इससे डेयरी क्षेत्र में स्वदेशी नस्लों की गुणवत्ता सुधरेगी और आयातित नस्लों पर निर्भरता भी घटेगी। इस प्रोजेक्ट के सफल परिणाम यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में देश के ग्रामीण और शहरी डेयरी किसानों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।












