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Kurukshetra news: कुरुक्षेत्र में बेमौसमी बारिश का कहर: गेहूं की फसल बर्बाद, सरकार के वादे खोखले

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Kurukshetra news: कुरुक्षेत्र में बेमौसमी बारिश का कहर: गेहूं की फसल बर्बाद, सरकार के वादे खोखले
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Kurukshetra news Unseasonal rain wreaks havoc Wheat crop destroyed: कुरुक्षेत्र के किसानों के लिए बेमौसमी बारिश किसी आपदा से कम नहीं रही। अनाज मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखी गेहूं की फसल भीगने से हजारों क्विंटल अनाज खराब हो गया। हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष और हरियाणा कॉन्फेड के पूर्व चेयरमैन बजरंग गर्ग ने सरकार की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के गेहूं और सरसों की खरीद, उठान और भुगतान 48 घंटे में करने के दावे पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। आइए, इस समस्या और इसके समाधान की दिशा में उठाए जा रहे कदमों को विस्तार से समझते हैं।

बारिश ने बिगाड़ा किसानों का खेल

कुरुक्षेत्र की अनाज मंडियों में बेमौसमी बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। सूखी और अच्छी क्वालिटी की गेहूं में 15 से 17 प्रतिशत तक नमी आ गई, जिससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई। बजरंग गर्ग ने बताया कि सरकार ने गेहूं में नमी की अधिकतम सीमा 12 प्रतिशत तय की है, जो मौजूदा हालात में अव्यवहारिक है। उन्होंने मांग की कि सरकार इसे बढ़ाकर 16 प्रतिशत करे, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में आसानी हो। बारिश के साथ-साथ सरकारी स्तर पर उचित प्रबंधन की कमी ने भी किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

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48 घंटे के वादे हुए फेल

मुख्यमंत्री ने गेहूं और सरसों की खरीद, उठान और भुगतान को 48 घंटे में पूरा करने का वादा किया था, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। गर्ग ने बताया कि सरसों बेचने के लिए किसान 20-20 दिन तक मंडियों में इंतजार करने को मजबूर हैं। न तो समय पर खरीद हो रही है और न ही भुगतान। इस देरी के चलते किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके।

उठान में देरी, ठेकेदारों की लापरवाही

अनाज मंडियों में गेहूं के उठान में हो रही देरी भी एक बड़ी समस्या है। सरकारी अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण गेहूं समय पर गोदामों तक नहीं पहुंच पा रहा, जिससे बारिश में फसल खराब हो रही है। कई बार गेहूं में नमी की वजह से घटती (वजन में कमी) हो जाती है, जिसका खामियाजा आढ़तियों को भुगतना पड़ता है। गर्ग ने सुझाव दिया कि सरकार को घटती का नुकसान आढ़तियों से वसूलने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों से रिकवरी करनी चाहिए। यह कदम न केवल किसानों, बल्कि आढ़तियों के हित में भी होगा।

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किसानों के लिए क्या है समाधान?

बजरंग गर्ग ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने मांग की कि गेहूं और सरसों की खरीद के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि किसानों को मंडियों में लंबा इंतजार न करना पड़े। साथ ही, उठान प्रक्रिया को तेज करने के लिए ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। गर्ग ने यह भी कहा कि सरकार को नमी की सीमा बढ़ाने के साथ-साथ भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित करना चाहिए। इन कदमों से न केवल किसानों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि अनाज मंडियों की कार्यप्रणाली में भी सुधार आएगा।

कुरुक्षेत्र के किसान अपनी मेहनत का उचित मूल्य पाने के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। बेमौसमी बारिश ने पहले ही उनकी फसल को नुकसान पहुंचाया है, और अब सरकारी लापरवाही उनकी मुश्किलें बढ़ा रही है। अगर सरकार समय रहते ठोस कदम उठाए, तो किसानों को राहत मिल सकती है। यह समय है कि सरकार अपने वादों को हकीकत में बदले और किसानों के हित में काम करे।

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भारत मेहंदीरत्ता

भारत मेहंदीरत्ता एक अनुभवी पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 11 वर्षों से ऑटो और क्रिकेट से जुड़ी खबरों पर रोचक और तथ्यपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की नवीनतम जानकारियों, जैसे कार-बाइक लॉन्च, प्राइस अपडेट्स, और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, के साथ-साथ क्रिकेट की दुनिया की रोमांचक खबरों, जैसे मैच अपडेट्स, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टूर्नामेंट विश्लेषण को कवर करती हैं। भारत का लेखन शैली जीवंत, गहन और पाठक-केंद्रित है, जो ऑटो और क्रिकेट प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित करता है।

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