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कुरुक्षेत्र मंडी अपडेट: थानेसर में MSP से 700 रुपये कम पर बिक रही सरसों, किसानों ने खोला मोर्चा

On: March 6, 2026 3:15 PM
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कुरुक्षेत्र मंडी अपडेट: थानेसर में MSP से 700 रुपये कम पर बिक रही सरसों, किसानों ने खोला मोर्चा
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कुरुक्षेत्र . हरियाणा के धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की मंडियों में सरसों की फसल पहुंचनी शुरू हो गई है, लेकिन थानेसर अनाज मंडी में किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई है। सरसों की सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण किसानों को अपनी मेहनत की कमाई निजी हाथों में कम दाम पर बेचनी पड़ रही है। कुरुक्षेत्र के किसानों का कहना है कि एक तरफ सरकार 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ थानेसर जैसी प्रमुख मंडी में खरीद सेंटर तक न होना दावों की पोल खोल रहा है।

काली सरसों पर 700 रुपये तक का तगड़ा घाटा

थानेसर अनाज मंडी पहुंचे किसानों ने बताया कि सरकार ने इस सीजन के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6,200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। बावजूद इसके, मंडी में काली सरसों महज 5,500 से 6,000 रुपये के बीच खरीदी जा रही है। किसानों के मुताबिक, सरकारी खरीद की अनुपस्थिति में उन्हें प्रति क्विंटल 500 से 700 रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। लागत और महंगाई के इस दौर में समर्थन मूल्य से कम पर फसल बेचना किसानों की कमर तोड़ रहा है।

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पीली सरसों ने कराया मुनाफा

मंडी का गणित इस बार काफी पेचीदा नजर आ रहा है। एक तरफ काली सरसों एमएसपी के लिए तरस रही है, तो वहीं पीली सरसों लेकर आए किसानों की चांदी हो रही है। आढ़तियों के अनुसार, पीली सरसों 7,500 रुपये प्रति क्विंटल तक के ऊंचे भाव पर बिक रही है, जो एमएसपी से करीब 1,300 रुपये अधिक है। काली और पीली सरसों के भाव में जमीन-आसमान का यह अंतर किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

शाहबाद और लाडवा की तर्ज पर खरीद की मांग

नाराज किसानों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और जिला प्रशासन से मांग की है कि थानेसर मंडी की अनदेखी बंद की जाए। किसानों का कहना है कि जब कुरुक्षेत्र की ही शाहबाद और लाडवा मंडियों में सरकारी खरीद की व्यवस्था हो सकती है, तो थानेसर के किसानों को क्यों छोड़ दिया गया है? किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सरकारी खरीद सेंटर शुरू नहीं हुआ, तो उनका घाटा बढ़ता जाएगा और वे औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर रहेंगे।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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