Milk Production India: India became the global leader in milk production, 5.54 crore farmers benefited from artificial insemination: (राष्ट्रीय गोकुल मिशन) केंद्र सरकार की एक दूरदर्शी योजना है, जिसका उद्देश्य देशी नस्लों का संरक्षण, दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि और आनुवंशिक सुधार है। इस मिशन ने भारत को दुग्ध उत्पादन में वैश्विक स्तर पर सिरमौर बना दिया है। पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार, 2014-15 में प्रति पशु औसत दुग्ध उत्पादन 1640 किलो था, जो 2023-24 में बढ़कर 2072 किलो हो गया है। (milk production India)
देशी नस्लों की उत्पादकता 927 किलो से बढ़कर 1292 किलो और भैंसों की उत्पादकता 1880 किलो से बढ़कर 2161 किलो हो गई है। कुल दूध उत्पादन 146.31 मिलियन टन से बढ़कर 239.30 मिलियन टन हो गया है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता 3000 किलो तक पहुंचाई जाए। (indigenous breed improvement)
तकनीकी पहल और सुधार Milk Production India
गोकुल मिशन के तहत कई तकनीकी उपाय अपनाए गए हैं:
कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के तहत 14.12 करोड़ गर्भाधान किए गए और 5.54 करोड़ किसान लाभान्वित हुए। (artificial insemination program)
देशी नस्लों जैसे गिर, साहीवाल, थारपारकर आदि के 4343 उच्च गुणवत्ता वाले सांडों का उत्पादन किया गया। (cow breed enhancement)
आईवीएफ और लिंग-विभेदित वीर्य तकनीक से नस्ल सुधार को गति दी गई। (IVF cattle technology)
जीनोमिक चयन तकनीक से आनुवंशिक सुधार को तेज किया गया। (genomic selection livestock)
इन प्रयासों से देशी नस्लों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है।
किसानों को मिला सीधा लाभ
गोकुल मिशन का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण किसानों को मिला है। 38,736 बहुउद्देशीय तकनीशियनों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं घर-द्वार पर उपलब्ध कराई जा सकें। (dairy farming India)
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने राज्यसभा में बताया कि यह मिशन न केवल पशुधन की गुणवत्ता सुधार रहा है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रहा है। (SP Singh Baghel dairy)
(राष्ट्रीय गोकुल मिशन) ने भारत को दुग्ध उत्पादन में नई ऊंचाई दी है और आने वाले वर्षों में यह मिशन और भी मजबूती से आगे बढ़ेगा।











