MSP C-2: Demand for minimum support price in Haryana: Farmers will get financial relief, know the truth of C2+50%: हरियाणा के किसान लंबे समय से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों के आधार पर C2+50% फॉर्मूले की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में सरकार A2+FL फॉर्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support price) तय करती है, जो किसानों को अपर्याप्त लगता है।
स्वामीनाथन कमीशन ने C2 यानी संपूर्ण लागत पर 50% मुनाफा जोड़कर MSP तय करने की सिफारिश की थी, जिससे किसानों की आय (farmers’ income) में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। यह मांग न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे देश के किसानों के लिए एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। आइए, इस मांग के पीछे की सच्चाई, फॉर्मूलों का अंतर, और किसानों को होने वाले फायदे को समझते हैं।
न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग: क्यों है इतना हंगामा? MSP C-2
न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support price) किसानों के लिए उनकी फसलों की उचित कीमत सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। हरियाणा में किसान दो प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। पहली, MSP की कानूनी गारंटी, ताकि निजी खरीदार भी तय मूल्य से कम पर फसल न खरीदें।
दूसरी, C2+50% फॉर्मूले के आधार पर MSP तय करने की मांग, जो स्वामीनाथन कमीशन (Swaminathan Commission) की सिफारिश है। वर्तमान में सरकार A2+FL फॉर्मूले का उपयोग करती है, जो किसानों को उनकी पूरी लागत का उचित मुआवजा नहीं देता। यह अंतर किसानों की नाराजगी का मुख्य कारण है।
A2+FL और C2 फॉर्मूले में क्या है अंतर?
A2+FL और C2 फॉर्मूले के बीच का अंतर समझना जरूरी है। A2 में किसान द्वारा किए गए नकद खर्च जैसे बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, ईंधन, और सिंचाई (irrigation) शामिल होती है। A2+FL में इसके साथ परिवार के सदस्यों की मेहनत का मूल्य भी जोड़ा जाता है।
वहीं, C2 फॉर्मूला संपूर्ण लागत (comprehensive cost) को ध्यान में रखता है, जिसमें जमीन का किराया, स्थायी पूंजी पर ब्याज, और कुल कृषि पूंजी पर ब्याज शामिल होता है। C2+50% फॉर्मूले से किसानों को 22 नोटिफाइड फसलों पर प्रति क्विंटल 155 से 2961 रुपये तक ज्यादा मिल सकते हैं, जिससे उनकी आय (farmers’ income) में भारी वृद्धि होगी।
स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें: क्यों ठंडे बस्ते में?
2004 में स्थापित राष्ट्रीय किसान आयोग (National Commission on Farmers) ने कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में 2006 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसने C2+50% फॉर्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support price) तय करने की सिफारिश की थी।
आयोग की 201 सिफारिशों में से यह सबसे चर्चित थी, जिसका मकसद खेती को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना और किसानों की आय (farmers’ income) बढ़ाना था। 2007 में नेशनल फार्मर पॉलिसी (NPF-2007) को मंजूरी मिली, लेकिन यूपीए सरकार ने इस सिफारिश को लागू नहीं किया। आज तक यह सिफारिश लागू नहीं हुई, जिसके चलते किसान बार-बार आंदोलन (farmers’ protest) कर रहे हैं।
C2+50% लागू होने से किसानों को क्या फायदा?
अगर सरकार C2+50% फॉर्मूले को लागू करती है, तो किसानों को उनकी फसलों की लागत (comprehensive cost) पर 50% मुनाफा मिलेगा। इससे धान, गेहूं, ज्वार, बाजरा, और अन्य फसलों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उदाहरण के लिए, 22 नोटिफाइड फसलों पर किसानों को प्रति क्विंटल 155 से 2961 रुपये तक अतिरिक्त मिल सकते हैं। यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा। हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह बदलाव किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
किसानों का आंदोलन और सरकार का रुख
हरियाणा और पंजाब के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support price) की गारंटी और C2+50% फॉर्मूले के लिए लगातार आंदोलन (farmers’ protest) कर रहे हैं।
सरकार का दावा है कि वह स्वामीनाथन कमीशन (Swaminathan Commission) के मुताबिक 50% मुनाफा दे रही है, लेकिन लागत को A2+FL के आधार पर तय करने के कारण किसानों को नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि C2 फॉर्मूला ही उनकी वास्तविक लागत को दर्शाता है। इस मांग को लेकर सरकार और किसानों के बीच तनातनी बनी हुई है।
समाज और सरकार की जिम्मेदारी
किसानों की मांगें केवल उनकी आय (farmers’ income) तक सीमित नहीं हैं; यह देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। सरकार को चाहिए कि वह स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों को लागू करे और MSP की कानूनी गारंटी दे।
साथ ही, समाज को भी किसानों के हक के लिए आवाज उठानी होगी। हमें यह समझना होगा कि किसान देश की रीढ़ हैं, और उनकी आर्थिक मजबूती ही देश की प्रगति की नींव है।
आगे की राह
हरियाणा में न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support price) की मांग एक आर्थिक और सामाजिक क्रांति की शुरुआत हो सकती है। C2+50% फॉर्मूले का लागू होना न केवल किसानों को उचित दाम दिलाएगा, बल्कि खेती को फिर से लाभकारी बनाएगा।
यह समय है कि सरकार और समाज मिलकर किसानों के हित में कदम उठाएं। हरियाणा के किसानों की यह पुकार देश के हर कोने तक पहुंचनी चाहिए, ताकि उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सके।













