Progressive Farming (पानीपत) : खेती को घाटे का सौदा मानने वाले लोग इसे पढ़कर चौंक जाएंगे! पानीपत के तीन दोस्तों एमबीए पास परमिंदर जागलान, इंजीनियर हर्ष दुरेजा और डॉक्टर सचिन गर्ग ने खेती को नया मुकाम दिया है। इन दोस्तों ने पोली और नेट हाउस में रंग-बिरंगी शिमला मिर्च, फ्रेंच खीरा और फूलों की खेती कर पिछले साल 12 करोड़ का टर्नओवर हासिल किया। दिल्ली से जयपुर तक इनकी सब्जियों और फूलों की डिमांड है। आइए, जानते हैं इनकी प्रेरक कहानी।
खेती की नई राह
परमिंदर जागलान ने 2007 में फाइनेंस मार्केटिंग में एमबीए किया। गुरुग्राम में ऑटो कंपनी में 6 महीने नौकरी करने के बाद 2012 में ऑस्ट्रेलिया से आए दोस्त अनुज के साथ मिलकर किसानों के लिए पोली और नेट हाउस लगाने का काम शुरू किया। फिर हर्ष दुरेजा के साथ मिलकर 2 एकड़ जमीन पर रंगीन शिमला मिर्च, बीज रहित फ्रेंच खीरा और फूलों की खेती शुरू की। शुरुआती तीन साल मुश्किलों भरे रहे, लेकिन जैसे-जैसे अनुभव बढ़ा, खेती का दायरा और आमदनी भी बढ़ने लगी। 2019 में डॉ. सचिन गर्ग भी इस जोड़ी में शामिल हो गए। आज इनकी खेती 100 एकड़ तक फैल चुकी है।
दिल्ली-चंडीगढ़ तक सप्लाई
इन तीनों दोस्तों की मेहनत ने पानीपत के इसराना और मतलौडा क्षेत्र को खेती का हब बना दिया है। इनकी रंग-बिरंगी शिमला मिर्च की मांग दिल्ली, चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर और जयपुर में है। फ्रेंच खीरा भी दिल्ली और चंडीगढ़ के बाजारों में खूब बिकता है। इसके अलावा, नेट हाउस में जरबेरा, मनी प्लांट और अन्य फूलों की खेती भी की जाती है, जिनकी डिमांड बड़े शहरों में रहती है। इनकी खेती ने न सिर्फ कमाई बढ़ाई, बल्कि नए तरीकों से खेती का मॉडल भी पेश किया।
400 लोगों को रोजगार
परमिंदर बताते हैं कि उनके यहां पोली व नेट हाउस में करीब 400 श्रमिक काम करते हैं। इनमें 350 महिलाएं हैं। श्रमिकों को लेकर थोड़ी दिक्कत आती है। सरकार मनरेगा के तहत किसानों को भी श्रमिक दिलाए तो 100 के बजाय 200 दिन का रोजगार तक देने को तैयार हैं। इससे न केवल किसानों की श्रमिकों की समस्या खत्म होगी, बल्कि लोगों को रोजगार भी ज्यादा मिलेगा।













