Sonipat News, (सोनीपत) : सोनीपत में बारिश ने किसानों की उम्मीदों को हवा दी है, लेकिन यमुना के उफान ने कई खेतों को नुकसान भी पहुंचाया। यमुना किनारे सैकड़ों एकड़ खेतों में पानी भर गया, और कई जगह जमीन नदी में बह गई। इस वजह से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। दूसरी ओर, सामान्य और ऊंचाई वाले खेतों में बारिश धान की फसल के लिए वरदान साबित हो रही है। लगातार बारिश से धान की फसल तेजी से बढ़ रही है, और अगेती किस्म की फसलों में बालियां बननी शुरू हो गई हैं। लेकिन ज्यादा बारिश और तेज हवा फसलों को गिरा सकती है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने का डर है।
धान की खेती का हाल
इस साल सोनीपत में 90 हजार एकड़ में धान की रोपाई और 15 हजार एकड़ में सीधी बिजाई की गई है। जिले में कुल 1 लाख 95 हजार एकड़ में फसलें बोई गई हैं, जिनमें 30 फीसदी अगेती किस्म की हैं। अगेती किस्म की फसलें 90 दिन में तैयार हो जाती हैं, जबकि सामान्य धान को 150 दिन लगते हैं। यमुना बेल्ट के किसान अगेती किस्मों को ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि इसके बाद वे दूसरी फसल भी ले सकते हैं। इस वजह से कई फसलें अब तैयार होने की कगार पर हैं।
बारिश से फायदा और नुकसान
लगातार बारिश से धान की फसल में तेजी आई है, और पौधों का वजन बढ़ रहा है। लेकिन तेज हवाओं की वजह से फसलें गिरने का खतरा बना हुआ है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है। जलभराव वाले इलाकों को छोड़ दें, तो धान की फसल अच्छी तरह बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल उत्पादन बढ़ने की पूरी संभावना है, बशर्ते बारिश और हवा ज्यादा नुकसान न करें।
पानी निकासी का इंतजाम जरूरी
धान की फसल को पानी से आमतौर पर ज्यादा नुकसान नहीं होता, लेकिन अगर पौधे पूरी तरह डूब जाएं, तो फसल गलने का खतरा रहता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों से पानी निकालने का इंतजाम करें। इसके लिए डीजल या इलेक्ट्रिक पंप किराए पर लिए जा सकते हैं। पानी निकालने के बाद फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
अच्छी पैदावार की उम्मीद
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि इस साल अच्छी बारिश की वजह से धान की फसल शानदार होने की उम्मीद है। अगर खेतों में ज्यादा पानी है, तो किसानों को निकासी का प्रबंध करना चाहिए। धान के लिए पानी कोई बड़ी समस्या नहीं है, और इस साल पैदावार बढ़ने की पूरी संभावना है।












