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कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विस्तार, किसानों को मिल रही सटीक जानकारी

On: दिसम्बर 17, 2025 7:43 पूर्वाह्न
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कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विस्तार, किसानों को मिल रही सटीक जानकारी
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देश में खेती को अधिक वैज्ञानिक और जोखिम से मुक्त बनाने के लिए सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का तेजी से उपयोग कर रही है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार AI की मदद से किसान अब मौसम, बुआई, कीट नियंत्रण, फसल निगरानी और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सूचनाएं तेज, स्थानीय और ज्यादा भरोसेमंद तरीके से प्राप्त कर पा रहे हैं।

खेती में AI क्यों बन रहा है जरूरी

भारत में खेती अब केवल अनुभव पर आधारित नहीं रह गई है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और बढ़ती लागत के बीच डेटा आधारित फैसले जरूरी हो गए हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक
किसानों के जोखिम को घटाती है
उत्पादन की योजना बेहतर बनाती है
और बाजार से जुड़ाव को मजबूत करती है

AI आधारित मौसम पूर्वानुमान से किसानों को लाभ

राज्यसभा में सरकार ने बताया कि खरीफ 2025 के लिए 13 राज्यों के चुनिंदा इलाकों में स्थानीय मॉनसून आगमन का अनुमान लगाने वाला AI पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया।

इस मॉडल की खासियत

इस परियोजना में
IMD के 125 वर्षों के वर्षा आंकड़े
NeuralGCM और ECMWF के AI सिस्टम
ओपन सोर्स तकनीक
का उपयोग किया गया

यह मॉडल पूरे देश की बजाय खेत स्तर के पास का मौसम संकेत देता है, जिससे बुआई का सही समय तय करना आसान होता है।

करोड़ों किसानों तक पहुंची जानकारी

सरकार के अनुसार इस AI पूर्वानुमान को एम किसान पोर्टल के माध्यम से
3 करोड़ 88 लाख से अधिक किसानों
तक एसएमएस द्वारा भेजा गया।
संदेश हिंदी, मराठी, ओड़िया, बांग्ला और पंजाबी भाषाओं में भेजे गए ताकि जानकारी स्थानीय स्तर पर समझ में आए।

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किसानों के फैसलों में दिखा असर

पूर्वानुमान के बाद मध्य प्रदेश और बिहार में किसानों से प्रतिक्रिया ली गई। सर्वे में सामने आया कि
31 से 52 प्रतिशत किसानों ने
बुआई और खेत की तैयारी का समय बदला
कुछ किसानों ने फसल और बीज चयन में भी बदलाव किया

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह संकेत है कि AI आधारित सलाह जमीन पर व्यवहारिक असर डाल रही है।

किसान ई मित्र बना डिजिटल सहायक

सरकार ने बताया कि किसान ई मित्र नाम का वॉइस आधारित AI चैटबॉट किसानों के लिए डिजिटल साथी की तरह काम कर रहा है।

किसान ई मित्र की प्रमुख सुविधाएं

11 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध
पीएम किसान, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े जवाब
अब तक 93 लाख से अधिक सवालों का समाधान

यह सेवा खास तौर पर उन किसानों के लिए उपयोगी है जो स्मार्टफोन का सीमित इस्तेमाल करते हैं।

कीट निगरानी से नुकसान पर नियंत्रण

जलवायु परिवर्तन के कारण कीट प्रकोप बढ़ रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने AI आधारित नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम विकसित किया है।

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यह सिस्टम क्या करता है

मोबाइल से कीट की फोटो लेकर पहचान
तुरंत समाधान की सलाह
66 फसलों और 432 से अधिक कीट प्रजातियों को कवर

इसका इस्तेमाल 10 हजार से ज्यादा कृषि विस्तार अधिकारी कर रहे हैं।

सैटेलाइट और फील्ड डेटा से फसल मैपिंग

AI की मदद से अब
कौन सी फसल कितने क्षेत्र में बोई गई
उसकी बढ़त कैसी है
मौसम का उस पर क्या असर है
इन सभी पहलुओं का विश्लेषण किया जा रहा है। इससे फसल जोखिम प्रबंधन और योजना निर्माण में मदद मिल रही है।

कृषि सप्लाई चेन में AI की भूमिका

लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार AI तकनीक
भंडारण की योजना
परिवहन की दक्षता
मंडी में कीमत अनुमान
मांग और आपूर्ति संतुलन
जैसी समस्याओं को कम कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ती है।

क्यों अहम है यह बदलाव

AI का यह विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि
खेती अब ज्यादा अनिश्चित हो गई है
गलत फैसलों का सीधा असर आय पर पड़ता है
तकनीक से खेती टिकाऊ बन सकती है

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नीति विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में AI किसानों की आमदनी बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

आगे क्या

सरकार का फोकस AI सिस्टम को
और अधिक राज्यों तक पहुंचाने
स्थानीय भाषाओं में सेवाएं बढ़ाने
और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी मजबूत करने
पर है। इससे खेती ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी बनने की उम्मीद है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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