PMFBY: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को किसानों के लिए ज्यादा भरोसेमंद और सरल बनाने के लिए डिजिटल तकनीक पर बड़ा दांव लगाया है। लक्ष्य साफ है कि फसल नुकसान की भरपाई समय पर हो और बीमा दावा सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंचे।
सरकार के मुताबिक, हाल के वर्षों में तकनीकी सुधारों की वजह से क्लेम भुगतान तेज हुआ है, पारदर्शिता बढ़ी है और किसानों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।
क्यों अहम है यह बदलाव
भारत में हर साल लाखों किसान प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होते हैं। समय पर बीमा भुगतान न मिलने से खेती और घरेलू खर्च दोनों प्रभावित होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सिस्टम से भरोसा बढ़ता है और योजना का असली लाभ जमीन तक पहुंचता है।
कृषि नीति विशेषज्ञ डॉ. आर के वर्मा कहते हैं कि जब क्लेम सीधे खाते में जाता है तो बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और किसान का जोखिम कम होता है।
राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल बना योजना की रीढ़
सरकार ने योजना के संचालन के लिए राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल तैयार किया है, जिसे पूरी व्यवस्था का केंद्रीय प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।
इस पोर्टल के जरिए
• किसान ऑनलाइन नामांकन कर सकते हैं
• प्रीमियम सब्सिडी और बीमा कंपनियों का समन्वय होता है
• क्लेम राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होती है
• हर चरण की डिजिटल निगरानी होती है
इससे डेटा में गड़बड़ी और देरी की शिकायतें काफी हद तक कम हुई हैं।
डिजिक्लेम मॉड्यूल से क्लेम में तेजी
खरीफ 2022 से डिजिक्लेम मॉड्यूल लागू किया गया है। इसे पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम और बीमा कंपनियों की लेखा प्रणालियों से जोड़ा गया है।
इस तकनीक का असर यह रहा कि
• भुगतान प्रक्रिया ऑटोमेटेड हुई
• मानवीय हस्तक्षेप घटा
• क्लेम में देरी कम हुई
फसल नुकसान आकलन में नई तकनीक
फसल कटाई प्रयोग के लिए CCE एग्री ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे फील्ड डेटा मोबाइल से सीधे पोर्टल पर अपलोड होता है।
साथ ही
• बीमा कंपनियों को निगरानी की अनुमति
• राज्य के भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल एकीकरण
• फर्जी दावों पर प्रभावी नियंत्रण
इन सुधारों से सही किसान को सही समय पर लाभ मिल रहा है।
किसानों की जागरूकता पर भी जोर
सरकार मानती है कि तकनीक तभी कारगर है जब किसान उसे समझें। इसी वजह से
• हर साल फसल बीमा सप्ताह
• गांव स्तर पर फसल बीमा पाठशालाएं
• मेरी पॉलिसी मेरे हाथ अभियान
इन अभियानों के तहत किसानों को उनकी बीमा पॉलिसी की हार्ड कॉपी दी जाती है, जिससे उन्हें अपने बीमा कवर पर भरोसा रहता है।
सब्सिडी और क्लेम भुगतान में बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में प्रीमियम सब्सिडी और क्लेम भुगतान दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
2022 23 से 2024 25 के बीच हजारों करोड़ रुपये किसानों तक सीधे पहुंचे, जिससे योजना की विश्वसनीयता मजबूत हुई।
आगे क्या
सरकार आने वाले समय में सैटेलाइट डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित आकलन को भी जोड़ने की तैयारी में है। इससे नुकसान का आकलन और तेज व सटीक होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में तकनीक के इस्तेमाल से क्लेम प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी बनी है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ा है और योजना अपने मूल उद्देश्य के करीब पहुंचती दिख रही है।













