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गर्मी में कमाई का फॉर्मूला: 70 दिनों में तैयार होगी मूंग की फसल, मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी

On: मई 14, 2026 1:17 अपराह्न
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गर्मी में कमाई का फॉर्मूला: 70 दिनों में तैयार होगी मूंग की फसल, मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी
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रोहतक, 14 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा के हिसार, सिरसा, भिवानी और रोहतक जैसे जिलों में जहां पानी की उपलब्धता कम है, वहां मूंग की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। गर्मी के इस मौसम में जब अन्य फसलों को बचाना मुश्किल होता है, मूंग की फसल कम सिंचाई में भी लहलहा उठती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से बुवाई करें, तो बहुत कम निवेश में लाखों का मुनाफा कमाया जा सकता है।

बुवाई का सही समय और खेत का चयन

मूंग की सफल पैदावार के लिए तापमान का सही होना बेहद जरूरी है। जब पारा 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच हो, तब इसकी बुवाई करना सबसे उत्तम माना जाता है। किसान भाई ध्यान रखें कि खेत में जल निकासी की व्यवस्था अच्छी हो ताकि अधिक बारिश या सिंचाई की स्थिति में जड़ें न सड़ें। रोजाना कम से कम 5से 6 घंटे की सीधी धूप वाले खेत मूंग के लिए सबसे बेहतर परिणाम देते हैं।

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मिट्टी की तैयारी और पोषक तत्व

बुवाई से पहले खेत की 15 से 20 सेंटीमीटर गहरी जुताई करना अनिवार्य है। गहरी जुताई से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और पौधों की जड़ें आसानी से फैलती हैं। मिट्टी तैयार करते समय सड़ी हुई गोबर की खाद डालना फायदेमंद रहता है। मूंग की खासियत यह है कि इसे अलग से ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इसके पौधे खुद हवा से नाइट्रोजन लेकर जमीन में जमा करते हैं।

सिंचाई और खरपतवार पर विशेष ध्यान

मूंग की फसल को दूसरी फसलों के मुकाबले बहुत कम पानी चाहिए होता है। गर्मी के दिनों में मिट्टी की नमी को देखते हुए हर 3 से 4 दिन में हल्की सिंचाई पर्याप्त रहती है। बुवाई के शुरुआती 20 दिनों तक खरपतवार नियंत्रण बहुत जरूरी है। इस दौरान एक या दो बार हाथ से निराई-गुड़ाई करने पर पौधों का विकास तेजी से होता है और फलियां अधिक संख्या में आती हैं।

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मिट्टी की सेहत सुधारेगी यह ‘जादुई’ फसल

मूंग दाल न केवल किसानों की जेब भरती है, बल्कि यह खेत की उर्वरता भी बढ़ाती है। यह मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन का स्तर बढ़ा देती है, जिससे अगली फसल में यूरिया की जरूरत कम पड़ती है। 60 से 70 दिनों में जब फलियां भूरी और सूखी दिखने लगें, तब इसकी कटाई कर लेनी चाहिए। समय पर कटाई करने से दाने बिखरने का खतरा कम रहता है और गुणवत्ता बनी रहती है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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