भारत सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को किसानों की आय सुरक्षा का मजबूत आधार बनाने के लिए पिछले एक दशक में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार हर साल राज्यों, संबंधित मंत्रालयों और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग CACP की सिफारिशों के बाद 22 अधिसूचित फसलों के लिए MSP तय करती है।
सबसे अहम मोड़ 2018-19 के केंद्रीय बजट में आया, जब यह स्पष्ट नीति बनाई गई कि MSP को उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक रखा जाएगा। इसके बाद खरीफ, रबी और वाणिज्यिक फसलों के समर्थन मूल्य में लगातार बढ़ोतरी देखी गई।
सरकार का दावा और जमीनी असर
सरकार के अनुसार MSP बढ़ोतरी का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचा है। फसल वर्ष 2024-25 में सरकारी खरीद और भुगतान के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं।
कुल सरकारी खरीद करीब 1,223 लाख मीट्रिक टन
कुल MSP भुगतान लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये
कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह राशि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ाने और छोटे किसानों की जोखिम क्षमता सुधारने में अहम भूमिका निभा रही है।
एक दशक में MSP कितना बढ़ा
2015-16 की तुलना में 2025-26 तक MSP में कई फसलों के लिए उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मोटे अनाज, दलहन और तिलहन फसलों में बढ़ोतरी सबसे ज्यादा रही है, जिससे पोषण आधारित खेती और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिला।
खरीफ फसलों में बढ़ोतरी का रुझान
रागी में लगभग 196 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाजों में 100 प्रतिशत से अधिक इजाफा
सोयाबीन और सूरजमुखी में दोगुनी के करीब बढ़त
विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव जलवायु अनुकूल फसलों को प्रोत्साहित करने की सरकारी रणनीति का हिस्सा है।
रबी फसलों में MSP का असर
गेहूं और चना में करीब 65 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि
मसूर और सरसों जैसी फसलों में 85 से 100 प्रतिशत से ज्यादा इजाफा
इससे रबी सीजन में किसानों की आय स्थिर रखने में मदद मिली है।
MSP लागू कैसे होता है
MSP सिर्फ घोषित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जमीन पर लागू करने के लिए कई एजेंसियां काम करती हैं।
भारतीय खाद्य निगम FCI और राज्य एजेंसियां गेहूं और धान की खरीद करती हैं
दलहन, तिलहन और कोपरा के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान PM AASHA लागू है
NAFED और NCCF मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीद करते हैं
कपास और जूट की खरीद क्रमशः CCI और JCI के जरिए होती है
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस ढांचे का उद्देश्य बाजार गिरावट के समय किसानों को न्यूनतम आय सुरक्षा देना है।
क्यों अहम है MSP नीति
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि MSP नीति के तीन बड़े प्रभाव सामने आए हैं।
किसानों को न्यूनतम आय की गारंटी
बाजार में अत्यधिक गिरावट से फसल कीमतों का संतुलन
मोटे अनाज और दलहन जैसी पोषक फसलों को बढ़ावा
हालांकि यह भी माना जाता है कि आगे चलकर खरीद व्यवस्था और क्षेत्रीय असमानताओं पर और सुधार की जरूरत होगी।
आगे क्या हो सकता है
सरकार संकेत दे चुकी है कि भविष्य में MSP नीति को डिजिटल खरीद, बेहतर भंडारण और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार और मजबूत किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MSP के साथ प्रोसेसिंग और निर्यात पर भी ध्यान दिया गया, तो किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी संभव है।













