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बागवानी के साथ उगाएं हल्दी, जानें ‘प्रगति’ वैरायटी की बुवाई का सही तरीका

On: मई 10, 2026 7:10 अपराह्न
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बागवानी के साथ उगाएं हल्दी, जानें 'प्रगति' वैरायटी की बुवाई का सही तरीका
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चंडीगढ़, 10 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (ICAR), कोझीकोड के वैज्ञानिकों ने हल्दी की एक ऐसी उन्नत किस्म तैयार की है जो खेती की तस्वीर बदल सकती है। इस नई किस्म का नाम ‘प्रगति’ रखा गया है। यह किस्म न केवल कम पानी और पाले को झेलने में सक्षम है, बल्कि कम समय में अधिक पैदावार देने का दावा करती है। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन और बेमौसम बारिश से जूझ रहे किसानों के लिए यह किस्म किसी वरदान से कम नहीं है।

बाजार में बढ़ेगी मांग और निर्यात के खुलेंगे रास्ते

हल्दी की गुणवत्ता उसकी करक्यूमिन मात्रा से तय होती है। ‘प्रगति’ में करक्यूमिन का स्तर 5.55 प्रतिशत पाया गया है, जो सामान्य किस्मों के मुकाबले काफी बेहतर है। इसके अलावा इसमें 13 प्रतिशत तक ओलियोरेसिन मौजूद है। यह विशेषता इसे फूड प्रोसेसिंग और विदेशी बाजारों में निर्यात के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है। दवा निर्माता कंपनियां उच्च करक्यूमिन वाली हल्दी के लिए किसानों को अधिक दाम देती हैं।

सिर्फ 6 महीने में फसल तैयार

आमतौर पर हल्दी की फसल पकने में 8 से 10 महीने का समय लेती है। प्रगति किस्म की सबसे बड़ी खूबी इसका केवल 180 दिनों में तैयार हो जाना है। इससे किसानों के खेत जल्दी खाली हो जाते हैं और वे दूसरी फसल की योजना बना सकते हैं। यह किस्म नेमाटोड जैसे हानिकारक कीटों के प्रति प्रतिरोधी है। स्वस्थ पौधे और जड़ें होने के कारण इसमें सड़ने की समस्या न के बराबर आती है।

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बुवाई की वैज्ञानिक तकनीक और उर्वरक प्रबंधन

बेहतर उत्पादन के लिए खेत की तैयारी के समय प्रति हेक्टेयर 200-250 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद डालना जरूरी है। बुवाई के दौरान 120 किलो नाइट्रोजन और 80-80 किलो फास्फोरस व पोटाश का मिश्रण मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है। बुवाई के लिए पौधों के बीच 40×20 सेमी की दूरी रखें। हल्दी के 20-25 ग्राम के प्रकंद (बीज) को 4 सेमी की गहराई में ही लगाना चाहिए। बीज को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के घोल से उपचारित करना अनिवार्य है।

बागवानी के साथ करें हल्दी की डबल खेती

प्रगति किस्म की खेती के लिए जरूरी नहीं कि आपके पास खाली खेत हो। किसान अपने पुराने आम या अमरूद के बागों में छायादार जगहों पर भी इसकी बुवाई कर सकते हैं। सीतापुर किस्म की तरह इसे इंटर-क्रॉप के तौर पर विकसित किया गया है। मेड़ बनाकर बुवाई करने से जल निकासी बेहतर रहती है और हल्दी की गांठों का आकार भी बड़ा होता है। यह मॉडल कम जमीन वाले किसानों के लिए आय बढ़ाने का सबसे सटीक जरिया है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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