हरियाणा सरकार ने दुकानों, होटल, शोरूम और दफ्तरों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए कानून को और स्पष्ट और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा ने हरियाणा दुकान और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान संशोधन विधेयक 2025 को मंजूरी दे दी है। यह बदलाव राज्य में काम कर रहे लाखों कर्मचारियों और छोटे कारोबारियों दोनों को सीधे प्रभावित करेगा।
नए कानून का उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करना, काम की शर्तों को पारदर्शी बनाना और छोटे व्यवसायों पर प्रशासनिक बोझ कम करना है।
क्या बदला है और क्यों जरूरी था
यह कानून पहली बार 1958 में बनाया गया था। तब न तो आज जैसी सेवा आधारित अर्थव्यवस्था थी और न ही निजी क्षेत्र में इतना विस्तार। समय के साथ काम के तरीके बदले लेकिन नियम पुराने ही बने रहे। सरकार और श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से अनौपचारिक रोजगार बढ़ा और श्रमिकों को कानूनी सुरक्षा नहीं मिल पाई।
नए संशोधन इसी खाई को भरने की कोशिश करते हैं।
हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र अनिवार्य
अब किसी भी दुकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान में काम करने वाले श्रमिक को लिखित नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र देना जरूरी होगा।
इसके फायदे साफ हैं
• नौकरी का कानूनी सबूत मिलेगा
• वेतन और काम का समय स्पष्ट रहेगा
• बीमा और सरकारी योजनाओं का लाभ लेना आसान होगा
श्रम मामलों के जानकारों के अनुसार यह कदम असंगठित क्षेत्र को धीरे धीरे औपचारिक ढांचे में लाने में मदद करेगा।
ओवरटाइम नियमों में बड़ा बदलाव
नए कानून के तहत तिमाही ओवरटाइम की सीमा को 50 घंटे से बढ़ाकर 156 घंटे कर दिया गया है।
इसका मतलब क्या है
• अतिरिक्त काम का पूरा भुगतान अनिवार्य
• हर ओवरटाइम घंटे का रिकॉर्ड रखना जरूरी
• ओवरटाइम कर्मचारी की सहमति से होगा
सरकार का कहना है कि इससे छुपे हुए ओवरटाइम की जगह पारदर्शी कमाई का रास्ता खुलेगा।
काम के घंटे बढ़े लेकिन साप्ताहिक सीमा वही
दैनिक कार्य समय अब अधिकतम 10 घंटे होगा, जो पहले 9 घंटे था। हालांकि सप्ताह में कुल काम 48 घंटे से ज्यादा नहीं कराया जा सकेगा।
लगातार काम करने की सीमा भी 5 घंटे से बढ़ाकर 6 घंटे कर दी गई है। श्रम विभाग के मुताबिक इससे व्यावसायिक जरूरतें पूरी होंगी और कर्मचारियों से मनमाने घंटे काम कराने पर रोक लगेगी।
छोटे उल्लंघनों पर जेल नहीं जुर्माना
पहले मामूली नियमों के उल्लंघन पर भी जेल का प्रावधान था। अब इसे बदल दिया गया है।
नई व्यवस्था
• छोटे उल्लंघन अपराध की श्रेणी से बाहर
• 3 हजार से 25 हजार रुपये तक जुर्माना
• बार बार गलती करने पर सख्त कार्रवाई संभव
इससे कानून का डर नहीं बल्कि नियमों की समझ बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
छोटे दुकानदारों को राहत
20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को अब पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें केवल ऑनलाइन सूचना देनी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे कारोबारी बिना डर के रोजगार दे सकेंगे और स्थानीय स्तर पर नौकरियां बढ़ेंगी। वहीं 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर पूरा कानून लागू रहेगा ताकि श्रमिकों की सुरक्षा बनी रहे।
पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी
पंजीकरण, फीस भुगतान और प्रतिष्ठान बंद करने की सूचना अब पूरी तरह डिजिटल होगी। एक दिन में स्वयं प्रमाणन के आधार पर पंजीकरण की सुविधा भी दी गई है।
श्रम मंत्री अनिल विज के अनुसार डिजिटल प्रक्रिया से भ्रष्टाचार कम होगा और कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
इसका असर किस पर पड़ेगा
यह कानून सीधे तौर पर
• दुकान और कार्यालय कर्मचारियों
• होटल और सेवा क्षेत्र के श्रमिकों
• छोटे और मध्यम कारोबारियों
को प्रभावित करेगा। विशेषज्ञ इसे श्रम सुधारों की दिशा में व्यावहारिक कदम मान रहे हैं जो रोजगार और अधिकारों के बीच संतुलन बनाता है।












