Anil Vij controversies, (चंडीगढ़)। हरियाणा की राजनीति में अनिल विज का नाम तो सुना ही होगा। ये वो दिग्गज नेता हैं जो बीजेपी के सात बार के विधायक हैं और अंबाला कैंट से लगातार जीतते आ रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में उनके बयानों ने पार्टी में हंगामा मचा रखा है। उन्होंने अपने ‘एक्स’ बायो से ‘मंत्री’ शब्द हटा लिया और ऐलान किया कि वह किसी टैग के मोहताज नहीं हैं। खासकर सीएम नायब सिंह सैनी और पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के साथ उनके रिश्ते हमेशा से ही तनावपूर्ण रहे हैं। आइए, इस डिटेल एक्सप्लेनर में जानते हैं अनिल विज के इन विवादों की पूरी कहानी, जो बीजेपी को बार-बार मुश्किल में डाल देते हैं।
12 सितंबर को उन्होंने ‘एक्स’ पर दावा किया कि कुछ लोग अंबाला छावनी में वरिष्ठ नेताओं के आशीर्वाद से BJP की “समानांतर” इकाई चला रहे हैं। इस पोस्ट ने सियासी हलचल मचा दी थी। हालांकि, विज ने साफ किया कि बायो से ‘मंत्री’ हटाने का इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। फिर भी, उनके इस कदम पर हर किसी की नजर है।
अनिल विज का बीजेपी में सफर
अनिल विज हरियाणा बीजेपी के पुराने सिपाही हैं। 1980 के दशक से वे सक्रिय हैं और 1996 व 2000 में निर्दलीय लड़कर भी जीते। 2009 से बीजेपी टिकट पर अंबाला कैंट से विधायक बने। 2014 में जब बीजेपी ने हरियाणा में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, तो विज को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उन्हें गृह, स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन जैसे भारी-भरकम विभाग मिले। लेकिन यहीं से विवादों की शुरुआत हो गई। पार्टी के अंदर वे खुद को सबसे सीनियर मानते हैं और सीएम पद की दावेदारी जताते रहे। 2014 में जब मनोहर लाल खट्टर को सीएम चुना गया, तो विज ने खुलेआम नाराजगी जताई। उन्होंने कहा था कि वे ही सबसे योग्य थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया।
मनोहर लाल खट्टर के साथ तकरार
मनोहर लाल खट्टर के दो कार्यकाल (2014-2024) में अनिल विज का रिश्ता हमेशा गर्मा-गरम रहा। सबसे बड़ा विवाद 2020 में हुआ, जब विज गृह मंत्री थे। उन्होंने इंसिस्ट किया कि राज्य की इंटेलिजेंस विंग (CID) के ब्रिफिंग सीएम के साथ-साथ उन्हें भी मिलनी चाहिए। लेकिन खट्टर ने इसे अपने पास रख लिया। मामला इतना बढ़ा कि दोनों को दिल्ली बीजेपी हाईकमान के पास जाना पड़ा।
आखिरकार, इंटेलिजेंस विंग खट्टर के पास चली गई। विज ने इसे अपनी हार माना और सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई। इसके अलावा, 2019 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी दोनों के बीच खींचतान की खबरें आईं। विज का कहना था कि पार्टी लीडरशिप उन्हें सही सपोर्ट नहीं दे रही। फिर भी, वे अपनी सीट से जीतते रहे और खट्टर कैबिनेट में ही बने रहे। लेकिन इन झगड़ों ने बीजेपी को कई बार शर्मिंदा किया।
वॉकआउट और ‘उड़न खटोला’ वाले तंज
2024 में बड़ा ट्विस्ट आया। मार्च में बीजेपी ने खट्टर को हटाकर नायब सिंह सैनी को सीएम बना दिया, लोकसभा चुनावों से पहले। विज को इस फैसले में कंसल्ट नहीं किया गया, जिससे वे बेहद नाराज हो गए। विधायक दल की मीटिंग से बीच में ही वॉकआउट कर लिया और सैनी की शपथ ग्रहण समारोह में भी नहीं गए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें इग्नोर किया।
सितंबर 2024 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विज ने खुला दावा किया, “अगर बीजेपी जीती तो मैं सीएम पद का क्लेम करूंगा। हरियाणा का चेहरा-मोहरा बदल दूंगा।” लेकिन चुनाव जीतने के बाद भी सैनी ही दोबारा सीएम बने। विज को ऊर्जा, परिवहन और श्रम विभाग मिले, लेकिन उनका फेवरेट गृह विभाग सैनी ने अपने पास रख लिया।
इसके बाद विवाद और तेज हो गए। जनवरी 2025 में विज ने सैनी पर तीखा तंज कसा, “जब से सीएम बने हैं, तब से उड़न खटोले (हेलिकॉप्टर) से नीचे नहीं उतरते। जमीन पर आओ तो लोगों की परेशानियां सुनाई दें।” उन्होंने अफसरों पर भी भड़के कि उनके ऑर्डर फॉलो नहीं हो रहे। फरवरी 2025 में तो हद हो गई।
विज ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि सैनी के करीबी दोस्त अशीष तायल ने चुनाव में उनके खिलाफ चित्रा सरवारा को सपोर्ट किया। उन्होंने तस्वीरें शेयर कीं और कहा, “ये वही वर्कर्स हैं जो विरोधी कैंडिडेट के साथ थे। सैनी के दोस्त ने मुझे हराने की साजिश रची।” साथ ही, राज्य BJP चीफ मोहन लाल बडोली पर भी निशाना साधा, जिनके खिलाफ गैंगरेप केस के आरोप हैं। विज ने कहा, “बडोली को इस्तीफा देना चाहिए।”
क्यों हैं अनिल विज बीजेपी के लिए मजबूत बेस?
विवादों के बावजूद, अनिल विज को BJP इग्नोर नहीं कर सकती। अंबाला कैंट में उनका मजबूत बेस है और वे एंटी-इनकंबेंसी को भी क्रॉस कर जीतते हैं। 2024 चुनाव में उन्होंने निर्दलीय चित्रा सरवारा को 7,248 वोटों से हराया। पार्टी जानती है कि विज के बिना नॉर्थ हरियाणा में दिक्कत हो सकती है। लेकिन उनके बागी तेवर पार्टी को बार-बार मुश्किल में डालते हैं। क्या ये विवाद बढ़ेंगे या सुलझेंगे? आने वाले दिनों में हरियाणा पॉलिटिक्स पर नजर रखनी होगी।
Anil Vij controversies पर बीजेपी का एक्शन
इन बयानों से BJP हाईकमान नाराज हो गया। फरवरी 2025 में राज्य अध्यक्ष बडोली ने विज को शो कॉज नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया कि उनके बयान पार्टी डिसिप्लिन के खिलाफ हैं और सीएम व प्रदेश चीफ के खिलाफ हैं। विज ने जवाब दिया, लेकिन डिटेल्स शेयर नहीं कीं। पार्टी ने उन्हें शांत रहने को कहा। सितंबर 2025 तक हालात और बिगड़ गए। विज ने कहा, “अंबाला कैंट में समानांतर BJP चल रही है, जिसे ऊपर वालों का आशीर्वाद है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लीडर्स और अफसर उनके खिलाफ काम कर रहे। सीएम सैनी ने इसे डाउनप्ले किया, कहा, “विज सीनियर लीडर हैं, उनकी राय का सम्मान। कोई नाराजगी नहीं।” लेकिन पार्टी के अंदर रिफ्ट साफ दिख रही है।











