Bike safety sensors: देश में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए सरकार अब तकनीक का सहारा लेने जा रही है। खासतौर पर दोपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए एक नया सिस्टम तैयार किया जा रहा है। यह सिस्टम बाइक चालक के हैंडल से हाथ हटाते ही उसकी रफ्तार अपने आप कम कर देगा।
सरकार का नया तकनीकी सुझाव—बचेंगे हजारों हादसे
सरकार का मानना है कि नई टेक्नोलॉजी सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बाइक स्टंट, एक हाथ से ड्राइविंग और मोबाइल पर बात करते हुए चलाने जैसी आदतों पर आसानी से रोक लग सकेगी।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार चाहती है कि वाहन निर्माता कंपनियां दोपहिया वाहनों के दोनों हैंडलबार पर टच या प्रेशर सेंसर लगाएं।
ये सेंसर लगातार जांचते रहेंगे कि चालक के दोनों हाथ हैंडल पर हैं या नहीं।
अगर 7–8 सेकंड से ज्यादा समय तक कोई हाथ हैंडल से हटता है,
तो बाइक की स्पीड अपने आप कम हो जाएगी।
इससे राइडर को मजबूरी में दोनों हाथों से वाहन पकड़कर चलाना होगा।
सरकार का मानना है कि यह सिस्टम उन लोगों पर तगड़ा नियंत्रण करेगा जो मोबाइल चलाते हुए या स्टंट करते हुए बाइक चलाते हैं।
दो पहिया वाहनों के हादसे तेजी से बढ़े
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में तेज बढ़ोतरी हुई है।
2021 में दोपहिया चालकों की मौत: 69,385
2023 में यह संख्या बढ़कर: 77,539
यह देश में कुल सड़क दुर्घटना में हुई मौतों का 45% है।
सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, कई हादसों में दोपहिया चालक न सिर्फ पीड़ित होते हैं, बल्कि कई मामलों में हादसे की वजह भी वही होते हैं।
केवल 2023 में, लापरवाह ड्राइविंग के कारण 48,181 लोगों की जान गई।
मंत्रालय और इंडस्ट्री के बीच बातचीत जारी
सूत्रों के मुताबिक, परिवहन मंत्रालय वाहन कंपनियों के साथ इस तकनीक पर विस्तार से चर्चा कर चुका है।
मंत्रालय का कहना है कि अगर वाहन खुद खतरनाक ड्राइविंग को पहचानकर तुरंत प्रतिक्रिया दें, तो सड़क पर लापरवाही काफी कम हो सकती है।
आज युवाओं में एक हाथ से बाइक चलाने या चलते समय मोबाइल इस्तेमाल करने का चलन बढ़ गया है। नई तकनीक इस लापरवाही को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।












