Chandigarh Municipal Corporation Budget Deficit of Rs 535 crore, will the city’s development stop: प्रशासन ने एक बार फिर मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ( एमएचए) के जॉइंट सेक्रेटरी को लेटर लिखकर 238 करोड़ रुपए का एडिशनल बजट मांगा है। इसके साथ ही फोर्थ दिल्ली फाइनेंस कमीशन (डीएफसी) की सिफारिशें लागू करने को कहा है। ये सिफारिशें लागू करने के लिए प्रशासन चार बार एमएचए को लिख चुका है।
सबसे पहला लेटर 11 जून 2020 को लिखा गया। इसके बाद 29 नवंबर 2023, 27 सितंबर 2024 और 26 मार्च 2025 को रिमाइंडर भेजे गए। इस बार लिखे गए लेटर में 2020 के लेटर और रिमाइंडर्स की कॉपी अटैच की गई है।
Chandigarh Municipal Corporation Budget: 535 करोड़ का घाटा
यह डेवलपमेंट हाल ही में शहर में आए एमएचए के एडिशनल होम सेक्रेटरी से मेयर हरप्रीत कौर बबला की मुलाकात के बाद हुआ है। मेयर ने एमसी को एडिशनल बजट 238 करोड़ की मांग को लेकर मुलाकात की थी। इसके साथ ही फोर्थ दिल्ली फाइनेंस कमीशन की सिफारिशें लागू करने की बात रखी थी। एडिशनल होम सेक्रेटरी के ग्रांट इन एड अपना रेवेन्यू 410 करोड़ मिलने का अनुमान इस हिसाब से एमसी का साल 2025-26 का बजट 535 करोड़ घाटे में है।
आश्वासन के बाद ही प्रशासन ने 27 जून को एमएचए को लेटर लिखा है। फोर्थ दिल्ली फाइनेंस कमीशन की सिफारिशें लागू होती हैं तो एमसी को ग्रांट इन एड के तौर पर 1704 करोड़ रुपए मिलेंगे। साल 2025-26 के बजट में यह रकम 625 करोड़ ही है। निगम में फंड की कमी के चलते दो साल से शहर के डेवलपमेंट वर्क रुके हुए हैं।
प्रशासन की ओर से जॉइंट सेक्रेटरी को लिखे लेटर में जिक्र किया गया है कि एमसी की साल 2025-25 में 960 करोड़ रुपए कमिटेड लायबिलिटी है। इसमें कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, एनपीएस कंट्रीब्यूशन, आउटसोर्स के वेजेज, फ्यूल, वॉटर और अन्य एसेंशियल सर्विसेज की इमरजेंसी रिपेयर और स्ट्रीट लाइट के बिजली बिल शामिल हैं।
एमसी शहर की 80% रोड व पार्किंग की रिकार्पेटिंग करवाता है। सड़कों की रिकार्पेटिंग के लिए 35 करोड़ चाहिए। फंड की कमी के चलते साल 2024-25 में केवल 73 करोड़ ही एसेंशियल प्रोजेक्ट पर खर्च कर पाया, जबकि 2025-26 में 467 करोड़ रुपए खर्च करने हैं। एमसी का बजट 535 करोड़ घाटे में है।
नगर निगम को कुछ नहीं मिल रहा
फोर्थ दिल्ली फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों के मुताबिक यूटी जो टैक्स कलेक्ट करता है उसका एक हिस्सा निगम को मिलना चाहिए। खासकर वैट और लोकल एक्साइज ड्यूटी का 30%, मोटर व्हीकल टैक्स व रजिस्ट्रेशन का 100%, सेल्स टैक्स का 25% और सर्विस टैक्स व स्टैम्प ड्यूटी कलेक्शन का 100% निगम को मिलना चाहिए।
यह लागू होता है तो चंडीगढ़ नगर निगम की आर्थिक हालत बड़े स्तर पर सुधर जाएगी। फोर्थ दिल्ली फाइनेंस कमीशन की सिफारिश तभी लागू होगी जब मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स इस बारे में मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस को निर्देश जारी करेगा। अगर फोर्थ दिल्ली कमीशन की सिफारिशें लागू होती हैं, तो एमसी को प्रशासन के रेवेन्यू शेयर से 1700 से 1800 करोड़ हर साल मिलने लगेगा। ऐसे में एमसी शहर के डेवलपमेंट वर्क बगैर रुके करवा सकेगा।
238 करोड़ चंडीगढ़ का ही सरप्लस पैसा
प्राइवेटाइजेशन से पहले बिजली विभाग मुनाफे में था। इसके 238 करोड़ प्रशासन के पास हैं। यह रकम दिल्ली कंसोलिडेटेड फंड में जमा न करवाने के बजाय प्रशासन एमसी को देगा, तो भी काफी हद तक शहर के काम होने लगेंगे।













