Chandigarh News, चंडीगढ़: चंडीगढ़ में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को लीज होल्ड से फ्री होल्ड में बदलने की चाहत अब महंगी पड़ने वाली है। यूटी प्रशासन ने कन्वर्जन चार्जेज को नए फॉर्मूले के साथ कलेक्टर रेट से जोड़ दिया है। अब जितना महंगा कलेक्टर रेट होगा, उतना ही ज्यादा कन्वर्जन चार्ज देना होगा। हर साल कलेक्टर रेट बदलने के साथ ही कन्वर्जन चार्ज भी अपने आप बढ़ जाएगा। प्रशासन ने यह बदलाव ‘चंडीगढ़ कन्वर्जन ऑफ रेजिडेंशियल लीज होल्ड लैंड टेन्योर इनटू फ्री होल्ड लैंड टेन्योर रूल्स 1996’ के तहत किए हैं।
नया फॉर्मूला, बढ़ी मुश्किलें
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष मदन लाल गर्ग ने बताया कि नया फॉर्मूला काफी जटिल है और इससे कन्वर्जन चार्ज में भारी बढ़ोतरी होगी। उनका कहना है कि पुराने रेट पर खरीदी गई जमीन को मौजूदा कलेक्टर रेट से जोड़ना ठीक नहीं है। इससे उन लोगों को झटका लगेगा जो प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड करवाने की सोच रहे थे। मनीमाजरा और सेक्टर-13 जैसे इलाकों में चार्जेज सेक्टर-38 से आगे के कलेक्टर रेट के आधार पर तय होंगे, जिससे लागत और बढ़ेगी।
पहले से दोगुने हुए चार्जेज
पहले 1996 और 2017 में प्रशासन ने वन-टाइम कन्वर्जन चार्ज तय किए थे। लेकिन तब से कलेक्टर रेट में दो-तीन बार बदलाव हो चुका है। 2017 की तुलना में अब कलेक्टर रेट कुछ इलाकों में दोगुने तक हो गए हैं। इसका असर यह है कि कन्वर्जन चार्ज भी कई गुना बढ़ गया है। उदाहरण के तौर पर, 50-150 वर्ग मीटर की प्रॉपर्टी के लिए 7.5% से लेकर 1000 वर्ग मीटर से ज्यादा की प्रॉपर्टी के लिए 25% तक कन्वर्जन चार्ज देना होगा।
फ्री होल्ड का फायदा
लीज होल्ड प्रॉपर्टी के मालिकों को हर साल इस्टेट ऑफिस या चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को ग्राउंड रेंट या लीज मनी देनी पड़ती है। फ्री होल्ड करवाने के बाद यह राशि जमा करने की जरूरत नहीं होगी, जिससे प्रॉपर्टी मालिकों को लंबे समय में राहत मिलेगी। टेनामेंट्स, ईडब्ल्यूएस, इंडस्ट्रियल लेबर हाउसेज, चीप हाउस, एलआईजी, एमआईजी, एचआईजी और एचआईजी अपर के लिए भी चार्ज इसी फॉर्मूले से तय होंगे।
कन्वर्जन चार्ज का हिसाब
कन्वर्जन चार्ज तय करने के लिए प्रॉपर्टी के कलेक्टर रेट को एनेक्शर-ए के पार्ट 2 में दिए गए चार्ज से गुणा किया जाएगा और फिर 1996 के लैंड रेट (1710 रुपये प्रति वर्ग मीटर) से विभाजित किया जाएगा। 50 वर्ग मीटर तक की प्रॉपर्टी के लिए कोई चार्ज नहीं है, जबकि 500-1000 वर्ग मीटर के लिए 22.5% और 1000 वर्ग मीटर से ज्यादा के लिए 25% चार्ज लागू होगा।












