Stanford Top 2 Percent Scientists List 2026 Chandigarh : स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की साल 2026 की दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में चंडीगढ़ के 111 शोधकर्ताओं ने स्थान बनाया है। इसमें पीजीआई के 55 और पंजाब यूनिवर्सिटी के 56 वैज्ञानिक शामिल हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य, पर्यावरण और तकनीक के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया है।
Stanford University top 2 percent scientists 2026 list : चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) और पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के 111 वैज्ञानिकों ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की वर्ष 2026 की सूची में स्थान पाकर वैश्विक पटल पर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। इस सूची में पीजीआई के 55 और पंजाब यूनिवर्सिटी के 56 शोधकर्ता शामिल हैं। यह अंतरराष्ट्रीय पहचान सीधे तौर पर दर्शाती है कि शहर के संस्थानों में गंभीर बीमारियों के उपचार, दवा निर्माण और पर्यावरण संरक्षण पर हो रहे शोध विश्व स्तरीय स्तर पर असर डाल रहे हैं।
पीजीआई के 55 वैज्ञानिक शामिल
पीजीआई चंडीगढ़ ने चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपना दबदबा साबित किया है। संस्थान के 55 डॉक्टरों और शोधकर्ताओं (PGI Chandigarh top researchers Elsevier) को वार्षिक शोध प्रभाव सूची में जगह मिली है, जबकि 21 विशेषज्ञों ने पूरे करियर के योगदान के आधार पर लाइफटाइम श्रेणी में उपस्थिति दर्ज कराई है।
इस सूची में डॉ. अरुणालोके के. चक्रवर्ती, डॉ. रितेश अग्रवाल, डॉ. आशुतोष नाथ अग्रवाल, डॉ. राधा कृष्ण धीमान, डॉ. अजय कुमार दुसेजा और डॉ. संदीप के. ग्रोवर प्रमुख हैं। इनके साथ ही डॉ. सुरजीत के. सिंह, डॉ. रविंद्र खैवाल और डॉ. दिगंबर बेहेरा भी शीर्ष शोधकर्ताओं में शामिल हैं।
वार्षिक श्रेणी में स्वास्थ्य अर्थशास्त्र और क्लिनिकल रिसर्च से जुड़े डॉ. शंकर प्रिंजा, डॉ. नवनीत सिंह, डॉ. अमन शर्मा, डॉ. विशाल शर्मा, डॉ. इंदरपाल एस. सहगल और डॉ. सोनू गोयल ने स्थान बनाया है। इन शोधकर्ताओं के काम से आम मरीजों के लिए इलाज के नए प्रोटोकॉल तैयार करने में मदद मिल रही है।
पीयू के 56 शोधकर्ताओं की उपलब्धि
पंजाब यूनिवर्सिटी के 56 अलग-अलग शोधकर्ताओं ने विभिन्न विज्ञान संकायों में अपनी शोध क्षमता साबित की है। विश्वविद्यालय (Panjab University scientists Stanford ranking) के 54 शोधकर्ता वार्षिक प्रभाव श्रेणी में और 28 वैज्ञानिक लाइफटाइम श्रेणी में शामिल हुए हैं, जिनमें 26 नाम दोनों सूचियों में दर्ज हैं।
पीयू के चयनित शोधकर्ताओं में केवल कृष्ण, हर्ष नैयर, गार्गी घोषाल, सुशील कुमार कंसल, सुरिंदर कुमार मेहता, सुमन मोर, भूपिंदर सिंह भूप, संतोष कुमार उपाध्याय, सूर्यकांत त्रिपाठी और संजय छिब्बर शामिल हैं।
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ये वैज्ञानिक केमिस्ट्री, फिजिक्स, पर्यावरण विज्ञान, फार्मेसी, इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इनके शोध सीधे तौर पर स्वच्छ जल, प्रदूषण नियंत्रण और किफायती दवाओं के विकास से जुड़े हैं, जिसका सीधा फायदा समाज को मिल रहा है।
चयन का पैमाना क्या रहा?
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की इस रैंकिंग में चयन का आधार केवल प्रकाशित शोधपत्रों की गिनती नहीं है। इसके लिए एल्सेवियर के स्कोपस डेटाबेस से वैज्ञानिकों के काम के वास्तविक प्रभाव को आंका गया है।
रैंकिंग तय करने के लिए शोधपत्रों को मिले साइटेशन (उद्धरण), एच-इंडेक्स, सह-लेखकत्व और संबंधित शोध पत्र में वैज्ञानिक की मुख्य भूमिका जैसे कड़े मानक तय किए गए। वार्षिक श्रेणी में वर्ष 2025 के शोध प्रभाव को परखा गया है, जबकि लाइफटाइम श्रेणी में वैज्ञानिक के पूरे करियर के योगदान को देखा गया है।
कुलपति ने शोध को सराहा
इस उपलब्धि पर पंजाब यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. मीनाक्षी गोयल ने सभी चयनित शोधकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय में चल रहे गुणवत्तापूर्ण शोध, अंतर-विषयक अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही निरंतर स्वीकृति का प्रमाण है। #ChandigarhNews #TopScientists #PGIChendigarh













