PGI cornea donation, चंडीगढ़ न्यूज : किसी को आंखों की रोशनी लौटाने के लिए किसी का कॉर्निया ट्रांसप्लांट करना जरूरी है। लेकिन आई डोनेशन कम होने से जरूरतमंद मरीजों को लंबे समय तक अंधकार में रहना पड़ता है। पीजीआई में 2000 मरीज कॉर्निया ट्रांसप्लांट के इंतजार में हैं। ऐसा नहीं है कि डोनेशन नहीं हो रहा है, लेकिन कुछ कॉर्निया डोनेशन के बाद भी मेडिकल कारणों के चलते इस्तेमाल नहीं हो पा रहे हैं। आई डोनेशन की शपथ तो बहुत सारे लोग लेते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद उनके घरवाले आई डोनेशन करना भूल जाते हैं या करते नहीं हैं।
मृतक के घरवाले कई बार भ्रांतियों के कारण डोनेशन के लिए आगे नहीं आते हैं। एडवांस आई सेंटर और आई बैंक इसके लिए लोगों को जागरूक कर रही है। रीजनल एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (रोटो) की टीम व काउंसलर्स ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों को कॉर्निया डोनेशन के लिए जागरूक करती है। लेकिन बहुत कम लोग उस कठिन समय में यह फैसला ले पाते हैं।
एडवांस आई सेंटर की आई बैंक इंचार्ज डॉ. पारुल गुप्ता चावला ने बताया कि एक कॉर्निया डोनेशन से कम से कम दो-तीन मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आ सकती है। पीजीआई में 1995 से अभी तक 10, 165 कॉर्निया डोनेशन हुए हैं और इनमें से 7,443 कॉर्निया ट्रांसप्लांट करके हजारों मरीजों की जिंदगी में नई रोशनी लाई गई है।
साल-दर-साल नेत्रदान के आंकड़े
PGI में नेत्रदान और ट्रांसप्लांट के आंकड़े प्रभावशाली हैं। 1996 से 2015 तक 4,939 डोनेशन में 3,964 ट्रांसप्लांट हुए। 2016 में 660 डोनेशन और 436 ट्रांसप्लांट, 2017 में 778 डोनेशन और 470 ट्रांसप्लांट, 2018 में 816 डोनेशन और 470 ट्रांसप्लांट, 2019 में 674 डोनेशन और 425 ट्रांसप्लांट हुए। कोविड काल में 2020 में 224 डोनेशन और 157 ट्रांसप्लांट, 2021 में 444 डोनेशन और 286 ट्रांसप्लांट, 2022 में 456 डोनेशन और 367 ट्रांसप्लांट, 2023 में 424 डोनेशन और 312 ट्रांसप्लांट, 2024 में 444 डोनेशन और 349 ट्रांसप्लांट हुए। 2025 में अब तक 306 डोनेशन दर्ज किए गए हैं।
बड़ा फर्क पैदा कर सकते हैं नर्सिंग स्टूडेंट
पीजीआई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एजुकेशन (नाइन) के स्टूडेंट्स ने बुधवार को आई डोनेशन थीम पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। एडवांस्ड आई सेंटर, पीजीआई और लायंस क्लब चंडीगढ़ सेंट्रल के सहयोग से फेस पेंटिंग, स्लोगन राइटिंग, पोस्टर मेकिंग और रंगोली प्रतियोगिता करवाई गई। उद्देश्य था नेत्रदान के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना और हेल्थ वर्कर्स की भूमिका को सामने लाना रहा, ताकि वे समाज को नेत्रदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित कर सकें।
नाइन की प्रिंसिपल डॉ. सुखपाल कौर ने कहा नर्सिंग स्टूडेंट्स नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे तो जमीनी स्तर पर बड़ा फर्क पैदा कर सकते हैं। उनकी भागीदारी से कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की जरूरत और डोनर आईज की उपलब्धता के बीच की खाई को पाटा जा सकता है।













