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Fake documents: चंडीगढ़ में 20 करोड़ की कोठी पर कब्जे की साजिश

On: जून 2, 2025 5:05 अपराह्न
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Fake documents: चंडीगढ़ में 20 करोड़ की कोठी पर कब्जे की साजिश
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Fake documents Conspiracy to take possession of a bungalow worth Rs 20 crore in Chandigarh: फर्जी दस्तावेज (Fake Documents) बनाकर चंडीगढ़ के सेक्टर 2 में 20 करोड़ रुपये की कोठी हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) ने तीन महिलाओं—राजिंदर कौर गिल, परमजीत कौर और कमलदीप कौर के खिलाफ FIR दर्ज की है। शिकायतकर्ता सतिंदर सिंह धालीवाल ने दावा किया कि इन महिलाओं ने झूठे हलफनामे और इकरारनामे के जरिए संपत्ति हड़पने की कोशिश की। यह मामला संपत्ति विवादों में धोखाधड़ी का गंभीर उदाहरण है। आइए, इस मामले को विस्तार से समझें।

Fake documents: संपत्ति विवाद की शुरुआत

सतिंदर सिंह धालीवाल ने 1997 में 15 लाख रुपये में कोठी की 50% हिस्सेदारी स्व. बचन कौर के वारिसों से खरीदी थी। उनके पास भुगतान की रसीदें और बैंक ड्राफ्ट मौजूद हैं। उसी दिन उन्हें कोठी के ईस्ट विंग का कब्जा (Property Possession) मिला। पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत भी उनके नाम दर्ज हुईं। लेकिन 1999 में तीनों महिलाओं ने फर्जी इकरारनामे के आधार पर सिविल कोर्ट से एक्स-पार्टी डिक्री (Ex-Parte Decree) हासिल की। इसमें दावा किया गया कि बचन कौर ने 1975 में संपत्ति के अधिकार दे दिए थे। यह दस्तावेज कभी भी एस्टेट ऑफिस या कोर्ट में सत्यापित नहीं हुआ।

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में इस फर्जी डिक्री को खारिज कर दिया। कोर्ट ने बचन कौर के वारिसों को 50% हिस्सेदारी का वैध हकदार माना। इसके बावजूद, तीनों महिलाओं ने फर्जी दस्तावेज (Fake Documents) के आधार पर एस्टेट ऑफिस में आपत्तियां दर्ज कीं। उन्होंने कोठी में निर्माण कार्य रोकने की कोशिश की। 2 अप्रैल 2025 को एस्टेट ऑफिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू किया। संपत्ति को दो बराबर हिस्सों में बांटा गया 50% बचन कौर के वारिसों और 50% स्व. साधु सिंह के वारिसों के नाम। यह फैसला संपत्ति विवाद (Property Dispute) में मील का पत्थर साबित हुआ।

जब सतिंदर सिंह धालीवाल 2 अप्रैल 2025 को कोठी की सफाई के लिए पहुंचे, तो तीनों महिलाओं ने हंगामा किया। उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया गया। धालीवाल ने थाना सेक्टर 3 में शिकायत दर्ज की। इसके बाद SDM सेंट्रल ने BNSS की धारा 164 के तहत स्टेटस-को ऑर्डर (Status Quo Order) जारी किया। एसएचओ को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया गया। मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) को सौंपी गई। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। जांच से और खुलासे होने की उम्मीद है।

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धोखाधड़ी की जटिल साजिश

शिकायत में खुलासा हुआ कि तीनों महिलाओं ने 1998 में एस्टेट ऑफिस में शपथपत्र देकर खुद को साधु सिंह की वारिस बताया। लेकिन सिविल कोर्ट में उनके दावे उलट थे। वहां उन्होंने कहा कि साधु सिंह की वसीयत में उन्हें अधिकार नहीं मिले। इन विरोधाभासी बयानों से साफ है कि फर्जी दस्तावेज (Fake Documents) बनाकर सरकारी दफ्तरों को गुमराह किया गया। यह धोखाधड़ी (Fraud) का गंभीर मामला है। पुलिस अब इस साजिश के पीछे अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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