Ghaziabad Expressway Accident , Tragic accident on KGP Expressway, double decker bus kills canter driver while changing tyre: फरीदाबाद के कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) एक्सप्रेसवे पर एक दुखद हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया।
अरुआ गांव के पास कैंटर का टायर बदल रहे चालक जगपाल सिंह की एक डबल डेकर बस की चपेट में आने से मौत हो गई। यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि सड़क सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठाता है। आइए, इस घटना की पूरी कहानी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में जानते हैं।
रात के सफर में टायर पंचर Ghaziabad Expressway Accident
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के धनसानी गांव के रहने वाले तरसपाल सिंह और उनके भाई जगपाल सिंह कैंटर चालक थे। दोनों भाई 1 मई की रात हरी मिर्च से लदा कैंटर लेकर राजस्थान के बासवाड़ा जा रहे थे।
हापुड़ होटल के पास से केजीपी एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के बाद उनका सफर सुचारू रूप से चल रहा था। लेकिन सुबह करीब चार बजे छायंसा टोल से चार किलोमीटर पहले अरुआ गांव के पास कैंटर का टायर अचानक पंचर हो गया। दोनों भाइयों ने वाहन को सड़क किनारे रोककर टायर बदलने का फैसला किया।
हादसे का भयावह मंजर
टायर बदलने की प्रक्रिया में तरसपाल पीछे से आ रहे वाहनों को बैटरी की रोशनी दिखाकर रास्ता दे रहे थे, ताकि कोई हादसा न हो। इस दौरान जगपाल कैंटर का टायर बदलने में व्यस्त थे।
लेकिन तभी एक डबल डेकर बस तेज रफ्तार में आई और जगपाल को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि जगपाल की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद बस चालक ने वाहन को जगपाल के ऊपर से उतारा और मौके से फरार हो गया। यह दृश्य तरसपाल के लिए दिल दहलाने वाला था, जिन्होंने अपने भाई को आंखों के सामने तड़पते देखा।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
हादसे की सूचना तुरंत 112 नंबर पर दी गई, जिसके बाद छायंसा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बस चालक के खिलाफ लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने का मामला दर्ज किया।
शुक्रवार को मृतक जगपाल का पोस्टमार्टम फरीदाबाद के बादशाह खान अस्पताल में कराया गया। पुलिस अब बस चालक की तलाश में जुटी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, ताकि फरार चालक को पकड़ा जा सके। इस हादसे ने सड़क पर काम करने वाले चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सड़क सुरक्षा पर सवाल
यह हादसा केजीपी एक्सप्रेसवे जैसे व्यस्त मार्ग पर सड़क सुरक्षा की खामियों को उजागर करता है। कैंटर जैसे भारी वाहनों को सड़क किनारे रोककर मरम्मत करना कितना जोखिम भरा हो सकता है,
यह जगपाल की मौत ने साबित कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे पर आपातकालीन लेन, बेहतर रोशनी, और चेतावनी संकेतों की कमी इस तरह के हादसों को बढ़ावा देती है। साथ ही, तेज रफ्तार से वाहन चलाने वाले चालकों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
एक परिवार का दर्द
जगपाल की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। तरसपाल ने बताया कि वह और उनका भाई मिलकर कैंटर चलाते थे और परिवार का गुजारा करते थे।
अब जगपाल की अनुपस्थिति में परिवार का भविष्य अनिश्चित हो गया है। यह हादसा न केवल एक व्यक्ति की जान ले गया, बल्कि एक परिवार की उम्मीदों को भी चकनाचूर कर गया।
सड़क सुरक्षा के लिए सबक
यह घटना प्रशासन और समाज के लिए एक चेतावनी है। सड़क पर वाहन खराब होने की स्थिति में चालकों को सुरक्षित स्थान पर काम करने की सुविधा मिलनी चाहिए।
साथ ही, रात के समय एक्सप्रेसवे पर गश्त और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। जगपाल की मौत हमें यह सिखाती है कि सड़क सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता।











