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Gita Mahotsav 2025: मेले में कश्मीरी पश्मीना शॉल के साथ सूट का जलवा, इतने महीने में होती है तैयार

On: नवम्बर 18, 2025 6:39 अपराह्न
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Gita Mahotsav 2025: मेले में कश्मीरी पश्मीना शॉल के साथ सूट का जलवा, इतने महीने में होती है तैयार
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Gita Mahotsav 2025, कुरुक्षेत्र: अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में लगे शिल्प मेले में जहां शिल्पकार अपनी-अपनी कारीगरी लेकर पहुंचे हैं वहीं कश्मीरी पश्मीना शॉल भी अपनी धमक बनाए हुए हैं।

पांच से छह माह में तैयार होने वाली यह शॉल पर्यटकों को खूब लुभा रही है। इसके साथ ही कश्मीरी सूट का भी अपना आकर्षण बना हुआ है।

Gita Mahotsav 2025: पश्मीना शॉल ने लुभाया

कश्मीर से आए शिल्पकार अख्तर बताते हैं कि यहां उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका स्टॉल नंबर 303 व 771 पर मिला है। कई सालों में लाखों रुपए के शॉल व कश्मीरी सूट वे गीता महोत्सव के दौरान पर्यटकों को बेच चुके हैं। इस गीता महोत्सव में आने वाले पर्यटक बहुत अधिक पसंद करते हैं।

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उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता की पश्मीना शाल को बनाने में काफी समय लग जाता है। इस शाल की कीमत लाखों रुपए में होती है। इस शाल को वैरायटी के हिसाब से पांच या छह माह में भी तैयार किया जा सकता है।

उन्होंने स्टॉल पर कश्मीरी शाल, लोई, कम्बल, सूट, फैरन आदि उत्पादों को कुरुक्षेत्र और आस-पास के पर्यटकों के लिए रखा है। इस महोत्सव में सालों से पर्यटकों की कश्मीरी शाल की पेशकश को पूरा करने का प्रयास कर रहे है। यहां महोत्सव में आने के लिए हमेशा उत्साहित रहते हैं।

उन्होंने बताया कि पुस्तों से उनका परिवार कश्मीरी शाल बनाने का काम कर रहा है। इस महोत्सव में पश्मीना की कश्मीरी शाल जिसकी कीमत एक हजार रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक है, लेकर आए हैं।

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मुगल काल में भी शॉल की जाती थी पसंद

अख्तर बताते हैं कि उच्च गुणवत्ता की कश्मीरी शाल बनाने में सालों का समय लग जाता है। इस शॉल को डोगरा, सिख और मुगल काल में भी पसंद किया गया है।

उस समय पश्मीना का बडा शाॅल प्रयोग किया जाता था और राजा महाराजा इस शाल को बडे ही शौंक के साथ पहनते थे। इस शिल्पकला को बढ़ावा देेने के लिए सरकार की तरफ से भी मदद मिलती है।

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राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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