Hardeep Chhillar gold medal: Created history in Athens, this wrestler was orphaned at the age of 5: (हरदीप छिल्लर गोल्ड मेडल) जीतकर भारत के लिए एक नया इतिहास रच गया है। झज्जर जिले के मंडोठी गांव के 16 वर्षीय पहलवान हरदीप छिल्लर ने ग्रीको रोमन U-17 वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में 110 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। यह भारत का इस प्रतियोगिता में पहला गोल्ड मेडल है।
फाइनल मुकाबले में हरदीप का सामना ईरान के पहलवान से हुआ। पहले हाफ में 0-3 से पिछड़ने के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की। उन्होंने (Duck under technique) का इस्तेमाल कर स्कोर बराबर किया और तकनीकी आधार पर जीत दर्ज की। यह तकनीक कुश्ती में बेहद चतुराई से अपनाई जाती है, जिसमें पहलवान विरोधी की पीठ की ओर पहुंचकर अंक हासिल करता है।
संघर्षों से भरी रही हरदीप की जिंदगी Hardeep Chhillar gold medal
हरदीप की कहानी सिर्फ खेल की नहीं, बल्कि जज्बे की मिसाल है। मात्र 5 साल की उम्र में एक सड़क हादसे में उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद उनके चाचा और भाई ने उन्हें पाला और कुश्ती में करियर बनाने के लिए अपनी जमीन तक बेच दी। कभी विवादों में रहने वाला मंडोठी गांव आज हरदीप की वजह से गर्व महसूस कर रहा है।
हरदीप ने इससे पहले भी (Asian U-17 wrestling championship) में वियतनाम में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर फ्री स्टाइल कुश्ती में भी वे स्वर्ण पदक विजेता रह चुके हैं।
भारत को मिला नया चैंपियन
हरदीप की जीत न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत के लिए गर्व का विषय है। उनकी तकनीक, आत्मविश्वास और संघर्ष की कहानी युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा देती है। (Indian wrestler wins gold) जैसी खबरें देश के खेल भविष्य को उज्ज्वल बनाती हैं।
हरदीप छिल्लर अब देश के उन खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया। उनकी सफलता हरियाणा की कुश्ती परंपरा को और मजबूत करती है।












