Haryana-Punjab water dispute , Political tussle over Bhakra water, BBMB recommends giving additional water to Haryana: हरियाणा और पंजाब के बीच भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के पानी को लेकर विवाद ने एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हरियाणा के दावों को झूठ का पुलिंदा करार दिया, जबकि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पंजाब से पानी रोकने के फैसले पर पुनर्विचार की अपील की। इस बीच, BBMB ने हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने की पैरवी करते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल को तीन से चार एक्शन प्लान सौंपे हैं। यह विवाद हरियाणा के किसानों और आम लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। आइए, इस मसले को गहराई से समझते हैं।
जल विवाद की जड़: BBMB की भूमिका Haryana-Punjab water dispute
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड, जो केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन है, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान को पानी और बिजली का वितरण करता है। हरियाणा का आरोप है कि पंजाब ने भाखड़ा नहर से उसका हिस्सा रोक लिया है, जिससे कई जिलों में पेयजल और सिंचाई संकट पैदा हो गया है।
BBMB के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा अपने तय कोटे से 103% पानी का उपयोग कर चुका है, जबकि पंजाब ने केवल 89% कोटा इस्तेमाल किया है। फिर भी, BBMB ने हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के लिए समाधान सुझाए हैं। इनमें एक योजना यह है कि 21 मई 2025 से शुरू होने वाले अगले सर्कल में हरियाणा के पानी में कटौती कर अभी अतिरिक्त आपूर्ति की जाए।
BBMB की बैठक और एक्शन प्लान
विवाद को सुलझाने के लिए BBMB के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने बुधवार को एक अहम बैठक बुलाई, जो दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक चली। इस बैठक में पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों के साथ बोर्ड के सदस्य शामिल हुए। BBMB ने हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के लिए तीन से चार एक्शन प्लान प्रस्तुत किए।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल, जो हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं, ने बोर्ड को त्वरित समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों के साथ एक और बैठक होगी, जिसमें इन प्लानों पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
पंजाब का पक्ष: भगवंत मान का पत्र
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हरियाणा के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने नायब सैनी को लिखे पत्र में कहा कि उन्होंने कभी अतिरिक्त पानी देने का वादा नहीं किया। मान ने दावा किया कि हरियाणा पहले ही अपने कोटे से ज्यादा पानी ले चुका है और अब सिंचाई के लिए 8,500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मांग रहा है।
उन्होंने कहा कि पंजाब ने 6 मार्च 2025 से मानवता के आधार पर 4,000 क्यूसेक पानी दिया, लेकिन अब धान और नरमे की खेती के लिए पंजाब के किसानों को पानी चाहिए। मान ने हरियाणा पर पानी के गलत उपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब अपने कानूनी हक से पीछे नहीं हटेगा।
हरियाणा की गुहार: नायब सैनी की अपील
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पंजाब के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भाखड़ा का पानी प्रकृति का है, जिस पर किसी एक राज्य का दावा नहीं हो सकता।
सैनी ने मान से पानी रोकने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की, ताकि हरियाणा के लोगों को पेयजल संकट से राहत मिले। उन्होंने दावा किया कि भगवंत मान ने पहले पानी देने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में वीडियो जारी कर मुकर गए। सैनी ने पंजाब को विकास और किसानों की भलाई में मुकाबला करने की चुनौती भी दी।
केंद्र का हस्तक्षेप
विवाद के गहराने पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मनोहर लाल ने BBMB से तत्काल रिपोर्ट मांगी और समाधान के लिए कदम उठाने को कहा। केंद्र का यह हस्तक्षेप दोनों राज्यों के बीच तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। BBMB की रिपोर्ट और एक्शन प्लान अब इस विवाद के समाधान की कुंजी बन सकते हैं।
हरियाणा-पंजाब के लिए पानी क्यों जरूरी?
हरियाणा और पंजाब दोनों ही कृषि प्रधान राज्य हैं, जहां भाखड़ा का पानी खेती और पेयजल के लिए रीढ़ की हड्डी है। हरियाणा में पानी की कमी से कई जिलों में फसलें प्रभावित हो रही हैं, और पेयजल संकट गहरा रहा है। दूसरी ओर, पंजाब को धान और नरमे की खेती के लिए पानी की जरूरत है। यह विवाद न केवल दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, बल्कि किसानों और आम लोगों के बीच तनाव भी बढ़ा रहा है।
जनता के लिए सुझाव
इस जल विवाद के बीच हरियाणा और पंजाब के लोगों को पानी का समझदारी से उपयोग करना होगा। घरों में पानी की बर्बादी रोकें और बारिश के पानी का संचय करें। किसानों को ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीकों को अपनाने की सलाह दी जाती है। स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण पर जागरूकता फैलाएं और अपने प्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर बात करें।
विवाद का समाधान: भविष्य की राह
हरियाणा-पंजाब जल विवाद का समाधान केवल बातचीत और सहयोग से ही संभव है। BBMB की मध्यस्थता और केंद्र सरकार की भूमिका इस मसले को हल करने में अहम होगी। दोनों राज्यों को अपने हितों के साथ-साथ क्षेत्रीय एकता को भी प्राथमिकता देनी होगी। यह समय है कि हरियाणा और पंजाब मिलकर पानी के बंटवारे का ऐसा रास्ता निकालें, जो सभी के लिए लाभकारी हो।












