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Haryana-Punjab water dispute: श्रुति चौधरी ने भगवंत मान के दावों को बताया झूठ, सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी

On: May 3, 2025 6:23 AM
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Haryana-Punjab water dispute: श्रुति चौधरी ने भगवंत मान के दावों को बताया झूठ, सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी
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Haryana-Punjab water dispute , Shruti Choudhary calls Bhagwant Mann’s claims false, threatens to go to Supreme Court: हरियाणा और पंजाब के बीच जल बंटवारे का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया,

जिसमें उन्होंने कहा था कि हरियाणा ने अपने हिस्से से 103% पानी का उपयोग कर लिया है। चौधरी ने इसे तथ्यहीन और राजनीति से प्रेरित बताया, साथ ही चेतावनी दी कि अगर यह मुद्दा हल नहीं हुआ तो हरियाणा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। यह बयान हरियाणा के किसानों और आम लोगों के लिए उनके हक की लड़ाई को और मजबूत करता है।

पंजाब का दावा: तथ्य या राजनीति? Haryana-Punjab water dispute

शुक्रवार को अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में श्रुति चौधरी ने पंजाब सरकार के रवैये को पूरी तरह राजनीतिक करार दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री का यह दावा कि हरियाणा ने अपने हिस्से का पानी खत्म कर लिया है, गलत और भ्रामक है।

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चौधरी के अनुसार, यह पानी भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) का है, न कि सिर्फ पंजाब का। पंजाब ने केवल कमी अवधि के आंकड़ों को आधार बनाकर यह दावा किया, जबकि पिछले साल के जल खातों से साफ है कि पंजाब को उसके हिस्से से 9.3% ज्यादा पानी मिला, जबकि हरियाणा को 0.198% कम।

चौधरी ने पिछले 20 साल के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पंजाब को उसके हिस्से से 22.44% अधिक पानी मिला, जबकि हरियाणा को सिर्फ 7.67% अतिरिक्त पानी दिया गया। ऐसे में पंजाब का यह कहना कि हरियाणा ने पानी का अतिरिक्त उपयोग किया, पूरी तरह आधारहीन है।

जल संकट: हरियाणा की मांग और पंजाब की अनदेखी

हरियाणा ने भाखड़ा में बंद अवधि के दौरान 4,000 क्यूसेक पानी की मांग की थी, ताकि राज्य की पेयजल जरूरतें पूरी हो सकें और दिल्ली, राजस्थान जैसे साझेदार राज्यों को भी आपूर्ति दी जा सके।

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लेकिन पंजाब ने केवल 3,000 क्यूसेक पानी ही जारी किया, जिसमें दिल्ली की 1,049 क्यूसेक जरूरत भी शामिल थी। इस कमी ने हरियाणा में जल संकट को बढ़ा दिया।

23 अप्रैल को टेक्निकल कमेटी मीटिंग (TCM) में फैसला हुआ कि 24 अप्रैल से 1 मई तक हरियाणा को 8,500 क्यूसेक पानी दिया जाएगा। लेकिन पंजाब ने इस सहमति के बावजूद BBMB को मांगपत्र नहीं भेजा,

जिसके चलते हरियाणा को पानी की कमी का सामना करना पड़ा। चौधरी ने इस रवैये को हरियाणा के हितों के खिलाफ बताया और कहा कि पंजाब की यह हरकत दिल्ली में मिली हार से उपजी हताशा का नतीजा है।

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सुप्रीम कोर्ट की राह

श्रुति चौधरी ने साफ कर दिया कि हरियाणा अपनी मांगों पर अडिग है। उन्होंने कहा कि अगर पंजाब के साथ जल बंटवारे का मुद्दा जल्द हल नहीं हुआ, तो हरियाणा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा। “हमारे पास सभी आंकड़े हैं। हरियाणा को अब तक कितना पानी मिला, यह तथ्य कोर्ट के सामने रखे जाएंगे। हम अपने हक का पानी लेकर रहेंगे,” चौधरी ने दृढ़ता से कहा। यह बयान हरियाणा के किसानों और नागरिकों के लिए एक भरोसा है कि उनकी सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगी।

हरियाणा के लिए पानी का महत्व

पानी का यह विवाद सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए पानी जीवनरेखा है। खेतों की सिंचाई से लेकर पीने के पानी तक, यह मुद्दा हरियाणा के हर नागरिक को प्रभावित करता है। श्रुति चौधरी का यह बयान न केवल पंजाब के दावों को चुनौती देता है, बल्कि हरियाणा के हक की लड़ाई को और मजबूत करता है। क्या यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचेगा, या दोनों राज्य आपसी सहमति से समाधान निकाल पाएंगे? यह सवाल हरियाणा के हर घर में गूंज रहा है।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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